खाता आपका, खेल साइबर ठगों का! कमीशन लेकर खाते दिए, 3.42 करोड़ का लेन-देन और 200 से ज्यादा शिकायतें

इंदौर। साइबर ठगी के लिए बैंक खाते किराए पर देने वाले एक संगठित नेटवर्क का एरोड्रम पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले 16 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े एक बैंक खाते में महज एक महीने के भीतर करीब 3.42 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन बैंक खातों के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में 200 से अधिक साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज मिली हैं।
डीसीपी नरेंद्र रावत के अनुसार, आरोपित कमीशन के बदले अपने और दूसरे लोगों के बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों में ठगी की रकम मंगाई जाती और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर उसे सर्कुलेट किया जाता था। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल इंदौर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर ठगों से भी जुड़े हैं।
एक खाते में महीनेभर में 3.42 करोड़ का लेन-देन
पहला मामला 1.44 लाख रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा है। ठगी की रकम जिन बैंक खातों में पहुंची, पुलिस ने उनका तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण शुरू किया। इसी दौरान म्यूल अकाउंट नेटवर्क का पता चला।जांच में एक संदिग्ध बैंक खाते में महज एक महीने में करीब 3.42 करोड़ रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिला। पुलिस के मुताबिक, इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के साथ-साथ ऑनलाइन सट्टे और गेमिंग से जुड़ी रकम के लेन-देन और सर्कुलेशन में भी किया जा रहा था।जब पुलिस ने बैंक खातों को लेकर राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों की जानकारी खंगाली तो देश के विभिन्न राज्यों में 200 से अधिक साइबर फ्रॉड शिकायतें सामने आईं। इससे पुलिस को अंदेशा है कि इन खातों का इस्तेमाल बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क में लगातार किया जा रहा था।
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एटीएम से लेकर चेकबुक तक बरामद
पहले मामले में गिरफ्तार छह आरोपितों के कब्जे से पुलिस ने 34 एटीएम/डेबिट कार्ड, 24 चेकबुक, 12 पासबुक और आठ मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा 1.08 लाख रुपये नकद, वाई-फाई राउटर और बैंक खातों से संबंधित जानकारी वाली डायरी भी मिली है।पुलिस अब बरामद डायरी और मोबाइल फोन में दर्ज बैंक खातों तथा संपर्कों की जानकारी खंगाल रही है। इससे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और साइबर ठगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
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क्रिप्टो निवेश के नाम पर 17.84 लाख की ठगी
दूसरी कार्रवाई क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर 17.84 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में हुई। शिकायत के बाद पुलिस ने NCRP पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी और बैंक खातों में हुए लेन-देन का विश्लेषण किया। ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़ने के बाद पुलिस नेटवर्क तक पहुंची और 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि इन आरोपितों की भूमिका म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने और ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करने में सामने आई है।
कमीशन के बदले खाते, फिर करोड़ों का सर्कुलेशन
जांच में सामने आए पैटर्न के अनुसार, नेटवर्क में शामिल लोग बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले कमीशन लेते थे। खाते और उनसे जुड़े एटीएम, चेकबुक तथा अन्य बैंकिंग माध्यम दूसरे लोगों को सौंप दिए जाते थे। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे अलग-अलग खातों में भेजने के लिए किया जाता था।
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नेटवर्क के आगे भी खुल सकते हैं राज
डीसीपी जोन-1 नरेंद्रसिंह रावत के मुताबिक, दोनों मामलों में गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि म्यूल खाते उपलब्ध कराने वाले आरोपितों के पीछे कौन लोग हैं और इन खातों का इस्तेमाल किन-किन साइबर ठगी के मामलों में किया गया।



















