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हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ मामले में पहली FIR दर्ज, खरगे की रैली के बाद हुई घटना ने बढ़ाया विवाद

हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ मामले ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना को लेकर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ पहली FIR दर्ज की।
हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ मामले में पहली FIR दर्ज, खरगे की रैली के बाद हुई घटना ने बढ़ाया विवाद
हल्द्वानी में खरगे की रैली के बाद शुद्धिकरण पर FIR

हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर अब पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। हल्द्वानी कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ पहली FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने यह कार्रवाई अधिवक्ता अंजू की लिखित शिकायत के आधार पर की है। मामले की जांच SP क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र को सौंपी गई है। पुलिस के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण के जरिए अनुसूचित जाति के व्यक्ति के प्रति जातिगत भेदभाव और सामाजिक अपमान की भावना पैदा की गई। इसके अलावा एक वीडियो के जरिए धार्मिक वैमनस्य फैलाने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

8 अगस्त को हुई थी खड़गे की सभा

मामला कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी में हुई जनसभा से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, 8 अगस्त को रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष की सभा आयोजित की गई थी। सभा खत्म होने के बाद 10 अगस्त को कुछ लोगों ने मैदान का कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ कराया। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए और देखते ही देखते मामला चर्चा में आ गया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर विरोध जताया। उनका आरोप था कि यह कदम सामाजिक और जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाला है। इसके बाद मामले में पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई। अब अधिवक्ता अंजू की शिकायत पर FIR दर्ज होने के बाद जांच का रास्ता साफ हो गया है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?

पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 196 और 299 के साथ SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत मामला दर्ज किया है। शिकायत में जाति के आधार पर भेदभाव, सामाजिक अपमान और अनुसूचित जाति के व्यक्ति के प्रति घृणा या हीनता की भावना पैदा करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। साथ ही शिकायत में एक ऐसे वीडियो का भी जिक्र है, जिसे भ्रामक और संभावित रूप से एडिटेड बताया गया है। आरोप है कि इस वीडियो के जरिए धार्मिक वैमनस्य फैलाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन सभी आरोपों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

अभी आरोपी अज्ञात, जांच के बाद होगी पहचान

फिलहाल FIR में किसी व्यक्ति को नामजद नहीं किया गया है। सभी आरोपियों को अज्ञात रखा गया है। SSP नैनीताल डॉ. मंजुनाथ टीसी के मुताबिक, पुलिस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर रही है। जांच के दौरान पुलिस घटना से जुड़े फोटो, वीडियो, CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खंगालेगी। इसके आधार पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कथित शुद्धिकरण में कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के मूल स्रोत की भी जांच करेगी। वीडियो असली है या उसमें किसी तरह की काट-छांट की गई है, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ आगे कार्रवाई की जा सकती है।

हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला

यह विवाद सिर्फ पुलिस थाने तक सीमित नहीं रहा था। मामले को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया था कि इस मामले में दो जीरो FIR दर्ज की गई थीं। इनमें एक FIR हल्द्वानी और दूसरी बेंगलुरु में दर्ज होने की जानकारी दी गई थी। सरकार ने कोर्ट को बताया था कि दोनों मामलों को जांच के लिए हल्द्वानी ट्रांसफर किया जाएगा। सरकार ने यह भरोसा भी दिलाया था कि घटना से जुड़े CCTV फुटेज और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखे जाएंगे। सरकार के इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया था।

भाजपा और कांग्रेस के बीच भी बढ़ा विवाद

रामलीला मैदान का यह मामला अब राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। घटना के बाद कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस से FIR दर्ज करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इसी विवाद में अलग-अलग जगहों पर FIR और जीरो FIR की चर्चा भी सामने आई। दोनों राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर मामले को राजनीतिक रंग देने के आरोप लगाए। अब हल्द्वानी पुलिस की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई FIR इस मामले की जांच को आगे बढ़ाने का आधार बनेगी।

अब जांच में सामने आएगा पूरा सच

अधिवक्ता अंजू की ओर से यह तहरीर 15 अगस्त को दी गई थी। शिकायत के बाद पुलिस ने अब मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच से यह साफ हो सकता है कि 10 अगस्त को रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम में कौन लोग शामिल थे, इसका आयोजन किसने किया और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो का असली स्रोत क्या है।

फिलहाल मामला अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज है। जांच के बाद साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान और नामजदगी की कार्रवाई हो सकती है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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