Bilaspur News:बिलासपुर सेंट्रल जेल मौत मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, डीजीपी और गृह सचिव 4 अगस्त को तलब

प्रेम कुमार, रायपुर/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर सेंट्रल जेल में कैदी श्रवण सूर्यवंशी की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य के डीजीपी और गृह सचिव को 4 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने हिरासत में मौत के मामले में एफआईआर और आपराधिक जांच की स्थिति पर भी जवाब मांगा है।
Raipur News: राष्ट्रपति भवन में बस्तर का ऐतिहासिक सम्मान: राष्ट्रपति मुर्मु ने खुद परोसा भोजन
सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती
बिलासपुर सेंट्रल जेल में कैदी श्रवण सूर्यवंशी की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने डीजीपी और गृह सचिव को 4 अगस्त को वर्चुअल माध्यम से पेश होकर सरकार का पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
1 लाख मुआवजे पर सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के निर्देश पर मृतक के परिजनों को दिए गए 1 लाख रुपये के मुआवजे को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि हिरासत में मौत जैसे मामलों में केवल मुआवजा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है।
क्या है पूरा मामला?
18 जनवरी 2024 को सीपत पुलिस ने श्रवण सूर्यवंशी को आबकारी एक्ट के तहत 6 लीटर कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे बिलासपुर सेंट्रल जेल भेजा गया। 21 जनवरी को उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 22 जनवरी की सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जांच में सामने आई गंभीर बात
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के निर्देश पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 176 के तहत न्यायिक जांच कराई गई। 22 जुलाई 2024 को आई जांच रिपोर्ट में मौत का कारण सिर में लगी गंभीर चोट से उत्पन्न जटिलताओं को बताया गया।
परिजनों की मांग
मृतक के परिजनों ने पुलिस और जेल अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, आपराधिक कार्रवाई शुरू करने और 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की थी। हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।
राज्य सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के हलफनामे पर असंतोष जताते हुए पूछा कि हिरासत में मौत के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज करने और आपराधिक जांच शुरू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।












