Manisha Dhanwani
2 Feb 2026
भागीरथपुरा में दूषित पानी से 65 वर्षीय अनिता कुशवाह ने रविवार रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनका इलाज बॉम्बे हॉस्पिटल में चल रहा था, जहां वे लंबे समय से वेंटिलेटर पर थीं। इस मौत के साथ ही भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है, जो प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।
मृतका के बेटे नीलेश ने बताया कि अनिता को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त की शिकायत पर उन्हें भाग्यश्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। दो दिन बाद डिस्चार्ज कर घर लाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई। इसके बाद 1 जनवरी को उन्हें अरबिंदो हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा।
हालत लगातार गंभीर होती गई और 4 जनवरी को उन्हें अरबिंदो हॉस्पिटल से बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। यहां संक्रमण ने शरीर पर पूरी तरह कब्जा कर लिया। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी किडनी फेल हो गई, जिसके चलते लगातार हेमोडायलिसिस करना पड़ा। बाद में उन्हें वेंटिलेटर पर भी रखा गया। इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया और अंततः मौत हो गई।
*सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी* ने कहा कि शासन की ओर से मरीज का हायर सेंटर पर इलाज कराया गया, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें बचाया नहीं जा सका। हालांकि सवाल यह है कि अगर समय रहते हालात पर काबू पा लिया जाता तो क्या यह जान बच सकती थी?
अनिता कुशवाह के पति मिल से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। उनका अंतिम संस्कार आज किया जाएगा। गौरतलब है कि भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे में अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन के मुताबिक 450 से अधिक मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं, लेकिन दूसरी ओर तीन मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से दो आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं, जिनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।