Shivani Gupta
22 Jan 2026
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस प्रशासनिक व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने आधिकारिक रूप से पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू कर दिया है। इसके साथ ही रायपुर को पहली बार पुलिस कमिश्नर मिला है। वरिष्ठ IPS अधिकारी संजीव शुक्ला को रायपुर का पहला पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। इस फैसले के साथ ही राजधानी में वर्षों से चली आ रही SP आधारित पुलिस व्यवस्था समाप्त हो गई है।
राज्य गृह विभाग की अधिसूचना के अनुसार, IG रैंक के वरिष्ठ IPS अधिकारी संजीव शुक्ला को रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है। वे इससे पहले बिलासपुर रेंज के IG के रूप में सेवाएं दे रहे थे। कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद रायपुर अर्बन पुलिस जिला उनकी सीधी कमान में रहेगा। अब राजधानी के शहरी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक, साइबर क्राइम और इंटेलिजेंस से जुड़े सभी निर्णय सीधे पुलिस कमिश्नर के स्तर पर लिए जाएंगे।
कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के साथ ही रायपुर में पारंपरिक Superintendent of Police (SP) आधारित व्यवस्था समाप्त हो गई है। अब प्रशासनिक ढांचा दो भागों में विभाजित किया गया है-
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क्षेत्र |
व्यवस्था |
नियंत्रण |
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रायपुर अर्बन |
कमिश्नरेट सिस्टम |
पुलिस कमिश्नर |
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रायपुर रूरल |
SP सिस्टम |
पुलिस अधीक्षक |
रायपुर शहरी क्षेत्र को तीन जोन में विभाजित किया गया है- सेंट्रल जोन, वेस्ट जोन और नॉर्थ जोन
शहरी थाने:
सिविल लाइन, देवेंद्र नगर, तेलीबांधा, कोतवाली, गंज, मौदहापारा, गोल बाजार, पुरानी बस्ती, डीडी नगर, आमानाका, आजाद चौक, सरस्वती नगर, कबीर नगर, राजेंद्र नगर, मुजगहन, टिकरापारा, उरला (नगर निगम बीरगांव क्षेत्र), खमतराई, गुढ़ियारी, पंडरी, खम्हारडीह
विधानसभा, धरसींवा, खरोरा, तिल्दा नेवरा, माना, मंदिर हसौद, आरंग, नवा रायपुर, राखी, अभनपुर, गोबरा नवापारा, उरला (नगर निगम सीमा के बाहर का क्षेत्र)
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पद |
संख्या |
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पुलिस आयुक्त |
1 |
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अतिरिक्त पुलिस आयुक्त |
1 |
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पुलिस उपायुक्त (DCP) |
5 |
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अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त |
9 |
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सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) |
21 |
नई अधिसूचना के तहत पुलिस कमिश्नर को कई अहम अधिकार प्रदान किए गए हैं-
पहले ये अधिकार जिला कलेक्टर और कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास होते थे।
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सरकार के अनुसार रायपुर और बिरगांव नगर निगम क्षेत्र की संयुक्त आबादी लगभग 19 लाख है। तेजी से बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, अपराध के बदलते स्वरूप, साइबर क्राइम और संगठित अपराध की चुनौतियों को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है। सरकार का मानना है कि, इससे पुलिस को अधिक स्वायत्तता, त्वरित निर्णय क्षमता और बेहतर जवाबदेही मिलेगी।
स्वीकृत पद: 3600
वर्तमान बल: करीब 2750
वास्तविक जरूरत: 7500 से ज्यादा
औसतन एक थाना: 30-35 स्टाफ
न्यूनतम आवश्यकता: 75 स्टाफ प्रति थाना
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