‘हिंदुओं को आसानी से मारा...'बांग्लादेश में हिंदुओं को खुलेआम धमकी? अल-कायदा कनेक्शन वाले नेता का VIDEO वायरल

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। चटगांव में आयोजित एक कार्यक्रम का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें कट्टरपंथी नेता के तौर पर पहचाने जाने वाले हारुन इजहार की ओर से हिंदुओं को लेकर धमकी भरी बात कहे जाने का दावा किया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वीडियो ‘दावा मूवमेंट’ नाम के एक कार्यक्रम से जुड़ा बताया जा रहा है। वीडियो में इजहार कथित तौर पर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की बात करता नजर आता है। इस बयान को लेकर बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, वायरल वीडियो के संदर्भ और उसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चटगांव की रैली में क्या हुआ?
रिपोर्ट्स के अनुसार, चटगांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हारुन इजहार ने हिंदुओं को लेकर कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की। दावे के मुताबिक, उसने कहा कि हिंदुओं को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है और इसके लिए उसे खुद कुछ करने की जरूरत नहीं होगी। उसके समर्थक ही ऐसा कर सकते हैं।
अगर वायरल वीडियो में कही गई बातें सही साबित होती हैं, तो यह बयान बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन सकता है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय को खुले तौर पर धमकी देने वाले बयानों पर प्रशासन की क्या कार्रवाई होगी।
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कौन है हारुन इजहार?
हारुन इजहार बांग्लादेश के चटगांव से जुड़ा एक कट्टरपंथी इस्लामी नेता है। वह हेफाजत-ए-इस्लाम से जुड़ा रहा है और पहले भी हिंसा तथा कट्टरपंथ से जुड़े मामलों में उसका नाम सामने आ चुका है। बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, 2021 में चटगांव में हुई हिंसा के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। उस समय पुलिस ने अदालत में उसके बयान और हिंसा में उसकी कथित भूमिका को लेकर जानकारी दी थी। उसका नाम इससे पहले भी भारत विरोधी प्रदर्शनों और कट्टरपंथी गतिविधियों से जुड़े विवादों में सामने आता रहा है। 2025 की एक रिपोर्ट में भी उसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंता पैदा करने वाला कट्टरपंथी चेहरा बताया गया था।
अल-कायदा से कनेक्शन का दावा
हारुन इजहार को लेकर लंबे समय से आतंकी और कट्टरपंथी संगठनों से संबंधों के आरोप लगते रहे हैं। 2009 में बांग्लादेशी अधिकारियों ने उसे ऐसे लोगों के साथ पकड़े जाने की बात कही थी, जिन पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने का संदेह था। उस समय चटगांव के एक मदरसे से अमेरिकी दूतावास और अन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कथित साजिश की जांच भी हुई थी। हालांकि, किसी व्यक्ति के बारे में आतंकी संगठन से जुड़ा होने का दावा करते समय आधिकारिक रिकॉर्ड और अदालत के निष्कर्षों को ध्यान में रखना जरूरी है। इजहार की पहचान और उसकी गतिविधियों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग दावे भी सामने आते रहे हैं।
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बांग्लादेश में AQIS को लेकर बढ़ी चिंता
इस पूरे मामले के बीच भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS की गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई गई है। हाल की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़ी रिपोर्टों पर आधारित खबरों में कहा गया है कि AQIS बांग्लादेश में अपनी गतिविधियों और नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में बांग्लादेश को संगठन के संभावित ऑपरेशनल नेटवर्क के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया गया है।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर क्यों उठ रहे सवाल?
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय देश की बड़ी धार्मिक अल्पसंख्यक आबादी में शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में मंदिरों, धार्मिक स्थलों और हिंदू समुदाय से जुड़े लोगों पर हमलों की खबरें सामने आती रही हैं। 2026 में भी बांग्लादेश से जुड़े एक ऑनलाइन चरमपंथी नेटवर्क को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें हिंदू धार्मिक स्थलों और त्योहारों को निशाना बनाने वाली कथित प्रचार सामग्री का जिक्र किया गया था। ऐसी घटनाओं और बयानों के सामने आने के बाद सवाल उठता है कि अल्पसंख्यक समुदाय को सुरक्षा देने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन किस तरह के कदम उठा रहे हैं।
चटगांव पहले भी रहा है चर्चा में
चटगांव और इसके आसपास के इलाकों में कट्टरपंथी गतिविधियों को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। हारुन इजहार का नाम भी कई मामलों में इसी क्षेत्र से जुड़ा रहा है। 2021 में उसे चटगांव में हुई हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे अलग-अलग मामलों में जमानत मिलने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा, चंद्रनाथ पहाड़ी और वहां मौजूद हिंदू धार्मिक स्थल को लेकर भी इजहार का नाम विवादों में आया था। इस मामले में प्रशासन को स्थिति पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
वायरल वीडियो ने फिर बढ़ाई चिंता
हिंदुओं को कथित धमकी देने वाला वीडियो सामने आने के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।











