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France Student Protest: फ्रांस में छात्रों का प्रदर्शन हिंसक, 5 हजार से ज्यादा गिरफ्तार; आगजनी और तोड़फोड़ की तस्वीरें वायरल

फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब हिंसक टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। देश के कई शहरों में स्कूलों के बाहर आगजनी, पुलिस से झड़प, तोड़फोड़ और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं। करीब 5 हजार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सैकड़ों स्कूलों का कामकाज प्रभावित हुआ है। 
France Student Protest: फ्रांस में छात्रों का प्रदर्शन हिंसक, 5 हजार से ज्यादा गिरफ्तार; आगजनी और तोड़फोड़ की तस्वीरें वायरल
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का गुस्सा

फ्रांस में स्कूलों की खराब स्थिति, शिक्षकों की कमी और शिक्षा बजट को लेकर छात्रों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। शुरुआत में स्कूलों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और रास्ते रोकने से शुरू हुआ आंदोलन कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव तक पहुंच गया। प्रदर्शन के दौरान कई जगह कूड़ेदानों और अन्य वस्तुओं में आग लगाई गई। कुछ स्कूलों के प्रवेश द्वार भी आग की चपेट में आए। पुलिस ने हालात नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। 

महिला के चेहरे की ओर आग छोड़ने का आरोप

इस हिंसा के बीच एक महिला पर हमले का वीडियो चर्चा में है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, महिला एक नकाबपोश किशोर से शांत रहने की अपील कर रही थी। इसी दौरान कुछ युवकों ने उसे बस स्टॉप की ओर धकेला और 15 साल के एक लड़के ने उसके चेहरे की दिशा में आग की लपटें छोड़ दीं। महिला ने हाथों और अपने शॉपिंग बैग से चेहरे को बचाने की कोशिश की। रिपोर्ट में बताया गया है कि उसकी जान बच गई, लेकिन चेहरा झुलस गया।

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स्कूलों में आगजनी और महिला पर हमले की घटना ने चौंकाया

फ्रांस में कितने स्कूल बंद हुए और कितने लोग गिरफ्तार?

फ्रांस में विरोध-प्रदर्शनों का असर शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक जीवन पर भी पड़ा है। अलग-अलग तारीखों के आंकड़ों में स्थिति बदलती रही है। 3 अक्टूबर की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार करीब 5,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया शुक्रवार को 564 स्कूल प्रदर्शन या व्यवधान से प्रभावित हुए। लगभग 400 हाई स्कूल बंद रहे या उनका कामकाज बाधित हुआ। कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। छात्रों, स्कूल कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरें सामने आईं।

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पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी, हजारों गिरफ्तार

मार्सिले में स्कूल प्रिंसिपल पर पेट्रोल डालकर जलाने का दावा

प्रदर्शन के दौरान स्कूल प्रशासन से जुड़े लोगों पर हमलों की भी खबरें आई हैं। मार्सिले के विक्टर ह्यूगो हाई स्कूल के प्रिंसिपल पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की घटना का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी हालत गंभीर बताई गई। रूएन और पेटिट-क्वेविली में भी स्कूल प्रिंसिपलों के घायल होने की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं ने स्कूलों में सुरक्षा और प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों तथा कर्मचारियों की रक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फ्रांस के शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ़्रे ने भी हिंसक समूहों द्वारा छात्र आंदोलन को प्रभावित किए जाने की आशंका जताई है।

फ्रांस में छात्र आखिर क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?

छात्र संगठनों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से कई समस्याएं बनी हुई हैं। उनका आरोप है कि सरकार की नीतियों और संसाधनों की कमी का सीधा असर पढ़ाई पर पड़ रहा है।

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फ्रांस में स्कूलों की बदहाली और बजट कटौती के खिलाफ आंदोलन हिंसक

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं- 

  • स्कूलों की जर्जर इमारतों की मरम्मत।
  • कक्षाओं में छात्रों की संख्या कम करना।
  • शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की कमी दूर करना।
  • शिक्षा बजट में कटौती रोकना।
  • लंबे स्कूल शेड्यूल और पढ़ाई के दबाव में सुधार।
  • उच्च शिक्षा में प्रवेश की व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत बनाना।

प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने बुलाई आपात बैठक

बढ़ती हिंसा और स्कूलों में व्यवधान के बीच फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने आपात बैठक बुलाई। सरकार के सामने एक ओर छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों का समाधान निकालने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं पर नियंत्रण करना भी जरूरी है। सरकार ने छात्रों की शिक्षा संबंधी शिकायतों को सुनने की बात कही है, लेकिन हिंसक गतिविधियों की निंदा की है। 

क्या फ्रांस के छात्र आंदोलन में राजनीति भी शामिल हो गई है?

फ्रांस में छात्र आंदोलन के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कुछ नेताओं और सरकारी पक्ष ने वामपंथी समूहों पर प्रदर्शन को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। वहीं संबंधित राजनीतिक दलों ने हिंसा से दूरी बनाते हुए छात्रों की मांगों का समर्थन किया है। यह आंदोलन ऐसे समय में तेज हुआ है, जब फ्रांस में बजट और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर बहस चल रही है। हालांकि, हिंसा के पीछे किसी एक राजनीतिक दल की भूमिका को निर्णायक रूप से स्थापित करने वाले दावे सावधानी से देखे जाने चाहिए। 

फ्रांस में हिंसा के बीच सबसे बड़ा सवाल

फ्रांस में शिक्षा सुधार की मांग से शुरू हुआ आंदोलन अब स्कूलों की सुरक्षा, पुलिस की कार्रवाई और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। छात्रों की मांगों में बुनियादी सुविधाओं और बेहतर शिक्षा का सवाल प्रमुख है, लेकिन आगजनी और हमलों की घटनाओं ने आंदोलन की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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