नेता प्रतिपक्ष के पदभार से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका:सोनिला मिमरोट के भाई बादशाह को पुलिस ने दबोचा

इंदौर। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद कांग्रेस की पहली बड़ी राजनीतिक गतिविधि से ठीक पहले पुलिस ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। नेता प्रतिपक्ष एवं वार्ड क्रमांक-45 की कांग्रेस पार्षद सोनिला मिमरोट के भाई बादशाह मिमरोट को पंढरीनाथ पुलिस ने रविवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी ऐसे समय हुई, जब बादशाह अपनी बहन के पदभार ग्रहण समारोह की तैयारियों में जुटा हुआ था। पुलिस की इस कार्रवाई से कांग्रेस नेताओं में हड़कंप मच गया।
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पंढरीनाथ थाना प्रभारी सतीश पटेल ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि कुछ दिन पहले कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बिगाड़ने और पुलिस अधिकारियों से अभद्रता का मामला सामने आया था। प्रदर्शन के दौरान एक महिला कांग्रेस नेत्री ने सार्वजनिक रूप से पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया था। जांच में बादशाह मिमरोट की भूमिका भी सामने आने पर उसे प्रकरण में आरोपी बनाया गया था।
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देर रात दबिश, सीधे हिरासत में लिया
रविवार देर रात जोन-4 के डीसीपी सुनील मेहता के निर्देश पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए बादशाह मिमरोट को हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच हलचल का माहौल बन गया। पुलिस उसे सीधे थाने ले गई, जहां उससे पूछताछ की गई।
जमानती केस में भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई
पुलिस सूत्रों के अनुसार जिस मामले में बादशाह मिमरोट को गिरफ्तार किया गया है, उसमें जमानती धाराएं लगी हुई हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उसके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की है, ताकि रिहाई के तुरंत बाद कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को रोका जा सके। सोमवार को उसे एसीपी कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।
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पदभार ग्रहण से पहले कांग्रेस की तैयारी पर असर
सोमवार को सोनिला मिमरोट नेता प्रतिपक्ष का औपचारिक पदभार ग्रहण करने वाली हैं। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम की तैयारियों की जिम्मेदारी बादशाह मिमरोट संभाल रहा था। लेकिन समारोह से कुछ घंटे पहले हुई गिरफ्तारी ने कांग्रेस खेमे की तैयारियों और रणनीति पर असर डाल दिया।
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राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा
बादशाह मिमरोट की गिरफ्तारी के बाद शहर के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस नेता इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है।












