आसाराम को निर्दोष बताने मीडिया के सामने आई थी लड़की! नारायण साईं की चालें और पत्नी से विवाद फिर चर्चा में

इंदौर। दुष्कर्म के मामले में दोषी आसाराम के पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद 13 साल पुराना घटनाक्रम एक बार फिर चर्चा में है। 31 अगस्त 2013 की वह रात आज भी याद की जाती है, जब नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में जोधपुर पुलिस ने इंदौर के खंडवा रोड स्थित आश्रम से आसाराम को गिरफ्तार किया था। उस समय पिता को गिरफ्तारी से बचाने के लिए बेटे नारायण साईं ने कई कोशिशें की थीं। यहां तक कि एक लड़की को मीडिया के सामने लाकर आसाराम को निर्दोष बताने की कोशिश भी की गई थी।
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आश्रम के बाहर जुटे समर्थक, पुलिस को बताया गया- अंदर नहीं हैं आसाराम
आसाराम की गिरफ्तारी के लिए जोधपुर पुलिस की टीम इंदौर पहुंची थी। पुलिस खंडवा रोड स्थित आश्रम में पहुंची तो उसे बताया गया कि आसाराम वहां मौजूद नहीं हैं। इस बीच आश्रम में बड़ी संख्या में अनुयायियों के जुटने की बात सामने आई। पुलिस पर दबाव बनाने के लिए भीड़ जुटाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।हालांकि, पुलिस अधिकारी आश्रम के बाहर डटे रहे। पुलिस आसाराम को गिरफ्तार करने के लिए कार्रवाई में जुटी थी। उस समय आश्रम में चल रही गतिविधियों और समर्थकों की मौजूदगी के बीच मामला लगातार गंभीर होता जा रहा था।
पिता को बचाने के लिए लड़की को मीडिया के सामने किया पेश
आसाराम को गिरफ्तारी से बचाने के लिए नारायण साईं ने उस समय एक और तरीका अपनाया था। उसने एक लड़की को मीडिया के सामने पेश किया। लड़की ने खुद को शिकायतकर्ता किशोरी की सहेली बताया और आसाराम पर लगाए गए आरोपों को गलत ठहराते हुए उन्हें निर्दोष बताया।जब लड़की पत्रकारों से बातचीत कर रही थी, तब नारायण साईं कथित तौर पर छिपकर पूरा घटनाक्रम देख रहा था। बाद में वह खुद भी मीडिया के सामने आया और अपने पिता का बचाव करते हुए उन्हें निर्दोष बताया। उसने आसाराम की तबीयत खराब होने की बात भी कही थी।हालांकि, इन कोशिशों के बावजूद पुलिस की कार्रवाई नहीं रुकी। देर रात जोधपुर पुलिस आसाराम को गिरफ्तार करके अपने साथ ले गई। यह घटनाक्रम उस समय काफी चर्चा में रहा था।
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बाद में नारायण साईं भी दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया गया
पिता को बचाने के लिए कोशिशें करने वाला नारायण साईं बाद में खुद भी एक अन्य दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया गया। उसके खिलाफ मामला सामने आने के बाद उसकी कानूनी मुश्किलें बढ़ गईं और उसे जेल जाना पड़ा। इस तरह पिता-पुत्र दोनों के मामले अलग-अलग समय पर सुर्खियों में रहे।
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पत्नी ने मांगा गुजारा भत्ता, हर महीने ₹50 हजार देने का था आदेश
नारायण साईं के जेल जाने के बाद उसकी पत्नी ने गुजारा भत्ता पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। खबर के मुताबिक, अदालत ने नारायण साईं को पत्नी को हर महीने 50 हजार रुपए देने का आदेश दिया था। हालांकि, आरोप है कि उसने इस आदेश का पालन नहीं किया और पत्नी को नियमित रूप से पैसे नहीं दिए।इसके बाद दोनों के रिश्ते में विवाद बढ़ता गया। अब दोनों का तलाक हो चुका है। इसी साल इंदौर की अदालत ने नारायण साईं को अपनी पूर्व पत्नी को 2 करोड़ रुपए देने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद नारायण साईं का वैवाहिक विवाद भी फिर चर्चा में आ गया है।
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पैरोल पर आसाराम के बाहर आने से फिर चर्चा में पुराना घटनाक्रम
आसाराम के 20 दिन की पैरोल पर बाहर आने की खबर के साथ ही इंदौर में उसकी गिरफ्तारी से जुड़ी यादें फिर ताजा हो गई हैं। वर्ष 2013 में खंडवा रोड स्थित आश्रम में पुलिस की कार्रवाई, समर्थकों की भीड़ और नारायण साईं की ओर से पिता के बचाव में दिए गए बयान उस घटनाक्रम के अहम हिस्से रहे थे।आसाराम की पैरोल, नारायण साईं के खिलाफ दर्ज मामले और उसकी पूर्व पत्नी को आर्थिक सहायता देने से जुड़े अदालती आदेश के कारण पिता-पुत्र से जुड़े पुराने विवाद एक बार फिर चर्चा में हैं।




















