इंदौर में बारिश थमी, फिर भी वाटर रिचार्जिंग पर जुर्माना; रहवासियों ने मांगी 6 महीने की मोहलत

इंदौर में मानसून की बारिश थमने के बाद भी नगर निगम की रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर स्पॉट फाइन की कार्रवाई जारी है। निगम की टीमें भवनों में वाटर रिचार्जिंग सिस्टम की जांच कर रही हैं और व्यवस्था नहीं मिलने पर जुर्माना लगा रही हैं। इस कार्रवाई को लेकर शहर में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। रहवासियों का कहना है कि जुर्माना लगाने के बजाय उन्हें अगले मानसून से पहले सिस्टम लगाने के लिए 6 महीने की मोहलत दी जानी चाहिए। नागरिकों का तर्क है कि वर्षा जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधारना जरूरी है लेकिन इसके लिए लोगों को जागरूक करने, तकनीकी जानकारी देने और तैयारी का समय देने पर भी जोर होना चाहिए। वहीं नगर निगम की कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि इस बारिश के सीजन में अब तक 156 भवनों पर कुल 16.03 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया जा चुका है।
156 भवनों पर 16.03 लाख रुपये का जुर्माना
नगर निगम के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वाटर रिचार्जिंग सिस्टम की जांच के दौरान अब तक 156 भवनों पर स्पॉट फाइन लगाया गया है। इनसे कुल 16.03 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। पिछले दो दिनों में ही 11 भवनों पर 3.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस कार्रवाई को लेकर नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि वर्षा जल संरक्षण की जरूरत से उन्हें इनकार नहीं है लेकिन कार्रवाई के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भवन मालिकों को सिस्टम लगाने की प्रक्रिया, लागत और तकनीकी विकल्पों की जानकारी मिले।
सितंबर में दो दिन में हुई थी करीब 2.5 इंच बारिश
इस मानसून में इंदौर में बारिश का वितरण असमान रहा। 11 सितंबर की रात से 12 सितंबर 2026 तक शहर में करीब 2.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी। इसके बावजूद 13 सितंबर तक सीजन की कुल बारिश लगभग 23 इंच तक पहुंची थी, जो सामान्य से कम बताई गई थी। इसके बाद भी बारिश का सिलसिला उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। अब रहवासियों का कहना है कि जब मौजूदा मानसून का दौर लगभग खत्म हो चुका है, तो निगम को तत्काल जुर्माना लगाने के बजाय लोगों को अगले मानसून से पहले वाटर रिचार्जिंग सिस्टम तैयार करने का समय देना चाहिए।
पूर्व पार्षद बोले- जुर्माने के बजाय जागरूकता पर जोर दें
पूर्व पार्षद संजय कटारिया का कहना है कि भूजल स्तर सुधारने के लिए वाटर रिचार्जिंग जरूरी है और इसे सभी पात्र भवनों में लागू किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने कहा कि स्पॉट फाइन की कार्रवाई से लोग घबराए हुए हैं। वाटर रिचार्जिंग का लाभ बारिश के दौरान ही दिखाई देगा, इसलिए फिलहाल समझाइश और जागरूकता पर जोर दिया जाना चाहिए। कटारिया ने बड़े संस्थानों में छोटे ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की जरूरत भी बताई। उनके मुताबिक कैंपस वाली कॉलोनियों में उपचारित पानी के दोबारा इस्तेमाल की व्यवस्था होनी चाहिए। हरियाली और अन्य जरूरतों के लिए भूजल पर निर्भरता कम करते हुए एसी, कूलर से निकलने वाले पानी सहित वैकल्पिक स्रोतों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सकता है।
रहवासी संघ ने बैठकें कर समझाने की मांग की
महालक्ष्मी रहवासी संघ के अध्यक्ष ब्रजेश पचौरी ने कहा कि नगर निगम को नागरिकों के साथ बैठकें कर पानी बचाने, उसका सीमित इस्तेमाल करने और उपलब्ध पानी का दोबारा उपयोग करने के तरीके समझाने चाहिए। उनका कहना है कि वाटर रिचार्जिंग के नाम पर लगातार जुर्माना लगाने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। निगम को फिलहाल स्पॉट फाइन में राहत देकर नागरिकों को सिस्टम तैयार करने का अवसर देना चाहिए। इससे लोग दबाव के बजाय जागरूकता के आधार पर वर्षा जल संरक्षण की व्यवस्था अपना सकेंगे।
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कांग्रेस ने भी कार्रवाई पर उठाए सवाल
कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि शहर में गड्ढे, गंदे पानी, जाम और अतिक्रमण जैसी समस्याएं भी हैं। यदि इन मामलों में निगम की लापरवाही पर सवाल उठते हैं, तो जनता को भी निगम की कार्यप्रणाली पर जवाब मांगने का अधिकार होना चाहिए। चौकसे ने कहा कि बारिश नहीं होने के बावजूद वाटर रिचार्जिंग सिस्टम नहीं लगाने पर जुर्माना वसूलना उचित नहीं है। उन्होंने इस मामले में निगम आयुक्त से मुलाकात कर शहरवासियों को राहत दिलाने की बात कही।
कर्मचारियों को रोज दो जगह कार्रवाई का लक्ष्य देने का दावा
नगर निगम के एक अधिकारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जांच और चालानी कार्रवाई लगातार जारी है। अधिकारी के अनुसार कार्रवाई से जुड़े कर्मचारियों को प्रतिदिन दो स्थानों पर कार्रवाई करने का लक्ष्य दिया गया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
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जल संरक्षण जरूरी लेकिन कार्रवाई के तरीके पर विवाद
इंदौर में वाटर रिचार्जिंग को लेकर चल रही कार्रवाई के बीच जल संरक्षण की जरूरत और जुर्माने के तरीके पर बहस तेज हो गई है। एक ओर वर्षा जल को जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर सुधारने की जरूरत है, तो दूसरी ओर रहवासी संघ और कांग्रेस का कहना है कि लोगों को सिस्टम लगाने के लिए पर्याप्त समय और मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए।




















