PU Special :भोपाल CGST जोन के करीब 14 अफसर भ्रष्टाचार के मामलों में CBI के शिकंजे में, चार साल में बढ़े केस

मध्यप्रदेश में पिछले चार वर्षों के दौरान सीजीएसटी, कस्टम्स और सेंट्रल एक्साइज के करीब 14 अधिकारी भ्रष्टाचार के मामलों में सीबीआई की कार्रवाई के दायरे में आए। भोपाल, जबलपुर, रायपुर और इटारसी में रिश्वतखोरी के मामले सामने आए। हाल ही में अधीक्षक राजेश कुमार को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। विभाग ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सख्त कार्रवाई की बात कही है।
भोपाल CGST जोन के करीब 14 अफसर भ्रष्टाचार के मामलों में CBI के शिकंजे में, चार साल में बढ़े केस

राजीव सोनी, भोपाल। मध्यप्रदेश में सीजीएसटी, कस्टम्स एवं सेंट्रल एक्साइज के भोपाल जोन में पिछले 4 साल के दौरान करीब 14 अधिकारी भ्रष्टाचार के मामलों में सीबीआई के शिकंजे में आए। भोपाल, जबलपुर, रायपुर और इटारसी में विभाग के ये अधिकारी लाखों रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए। इनमें ज्यादातर मामले प्रिवेंटिव ब्रांच के अधिकारियों से जुड़े हैं। सीबीआई की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि प्रिवेंटिव एवं खुफिया विंग के कुछ अधिकारी कार्टेल बनाकर कथित तौर पर वसूली का यह गोरखधंधा चला रहे थे।

राजेश गुप्ता को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया

सीबीआई ने हाल ही में इसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए प्रिवेंटिव ब्रांच के अधीक्षक राजेश कुमार को दो लाख रुपये की रिश्वत और उनके घर से 72.5 लाख रुपये नकद के साथ गिरफ्तार किया। इससे पहले जून 2023 में जबलपुर में प्रिवेंटिव विंग के पांच अधिकारी भी रंगे हाथों पकड़े गए थे। सीबीआई ने उन्हें दफ्तर में नोट गिनते हुए पकड़ा था, जबकि उनके घरों से 83.26 लाख रुपये जब्त किए गए थे।

जबलपुर में एक करोड़ की अड़ी 

जबलपुर के इस चर्चित प्रकरण में अधीक्षक कपिल कांबले एवं सोमेन गोस्वामी के अलावा तीन इंस्पेक्टर वीरेंद्र जैन, विकास गुप्ता और प्रदीप हजारी शामिल थे। आरोप है कि इन अधिकारियों ने एक फैक्टरी को सील कर एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। दूसरा मामला दिसंबर 2024 का है, जो जबलपुर में ही सामने आया था। इसमें असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा और इंस्पेक्टर सचिन खरे पर एक होटल कारोबारी से 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप था। दोनों को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था, जबकि उस समय अधीक्षक मुकेश वर्मन फरार हो गए थे। कुछ समय पहले ही वर्मन को जमानत मिली है।

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अप्रैल 2022 के केस के बाद बदल दी थी पूरी ब्रांच

भोपाल में अप्रैल 2022 में प्रिवेंटिव ब्रांच के अधीक्षक अंकुर खंडेलवाल, चेतन सक्सेना और इंस्पेक्टर मधुकर भी सीबीआई के शिकंजे में आ चुके हैं। यह मामला सामने आने के बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए पूरी प्रिवेंटिव ब्रांच को ही बदल दिया था। उस समय 15-16 अधिकारियों को हटाया गया था। विभाग की प्रिंसिपल कमिश्नर एन. पद्मश्री ने राजेश कुमार के मामले में भी सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

प्रिवेंटिव और इंटेलिजेंस विंग पर सवाल 

रिश्वतखोरी के इन मामलों में अमूमन प्रिवेंटिव और इंटेलिजेंस विंग के मैदानी अधिकारियों के नाम सामने आए। हालांकि, सीबीआई की जांच में कथित वसूली के इस नेटवर्क में कार्टेल और अन्य अधिकारियों के कनेक्शन की बात भी सामने आई। मार्च 2026 में रतलाम के असिस्टेंट कमिश्नर शंकर परमार डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए थे। इससे पहले 2024 में इंदौर के केपी राजन को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।

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जीरो टॉलरेंस की नीति, सख्त कार्रवाई होगी

 इस बारे में सीजीएसटी, कस्टम्स एवं सेंट्रल एक्साइज भोपाल जोन के चीफ कमिश्नर मानस रंजन मोहंती कहते हैं कि “भ्रष्टाचार की ये घटनाएं शर्मनाक और दुखद हैं। विभागीय स्तर पर जीरो टॉलरेंस की नीति है। ऐसे मामलों में विभागीय स्तर पर सख्त कार्रवाई होगी। सिस्टम को भी दुरुस्त करेंगे।”

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By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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