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सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने पर ST आयोग सख्त, MP सरकार से 3 दिन में मांगा जवाब

सीहोर के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 मकान तोड़े जाने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। मुख्य सचिव, DGP और सीहोर कलेक्टर-SP समेत संबंधित अधिकारियों से 3 दिन में जवाब मांगा गया है। शिवराज सिंह चौहान ने कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी।
सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने पर ST आयोग सख्त, MP सरकार से 3 दिन में मांगा जवाब
आदिवासी परिवारों के 12 मकान तोड़ने पर ST आयोग सख्त

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 मकान तोड़े जाने का मामला अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), वन विभाग के प्रमुख सचिव, सीहोर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक समेत संबंधित अधिकारियों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। आयोग की ओर से 12 अक्टूबर को जारी नोटिस में मामले पर संज्ञान लेने का उल्लेख किया गया है। यह मामला वन विकास निगम की कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और उनकी फसलों को नुकसान पहुंचने से जुड़ा है। आयोग के नोटिस के बाद संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई और उससे जुड़े तथ्यों पर जवाब देना होगा।

वन विकास निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

कोसमी गांव में हुई कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों के 12 मकान तोड़े जाने और खेतों में खड़ी फसल कुचले जाने की बात सामने आई है। प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान को लेकर मामला चर्चा में है। कार्रवाई के तरीके और मौके पर अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं। घटना के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों से मिलने गांव पहुंचे थे। उन्होंने कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा था, मेरे क्षेत्र में जुल्म की इंतहा हुई है, अन्याय की पराकाष्ठा हुई है। शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया था कि लोगों के वर्षों पुराने घर गिरा दिए गए और उनकी फसलें कुचल दी गईं। उन्होंने कुओं को भर दिए जाने की बात भी कही थी। इस कार्रवाई को शर्मनाक बताते हुए उन्होंने कहा था कि ऐसा करने वालों को भगवान भी माफ नहीं करेगा।

शिवराज ने अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर जताई नाराजगी

प्रभावित परिवारों से मुलाकात के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने मौके पर वन विकास निगम और प्रशासन के किसी बड़े अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को फोन कर मामले की जानकारी दी और कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति बताई थी। शिवराज ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया था कि गरीबों को बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा था कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही

मामले पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा था कि सरकार ने घटना की रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मामले में हस्तक्षेप करते हुए संबंधित अधिकारियों से तीन दिन में जवाब मांगा है। आयोग के नोटिस के बाद कार्रवाई के तथ्यों, मकान तोड़े जाने की परिस्थितियों और प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान से जुड़े सवालों पर प्रशासन का जवाब महत्वपूर्ण होगा।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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