PU Special :माताएं बनेंगी जीवनदात्री, मप्र में 8 नए मदर मिल्क बैंक शुरू करने की तैयारी, 240 लीटर मां का दूध हो सकेगा स्टोर

मप्र में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज सहित आठ नए मदर मिल्क बैंक शुरू होने जा रहे हैं। इनसे समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले उन नवजातों को सुरक्षित डोनर मिल्क उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिन्हें अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता।
माताएं बनेंगी जीवनदात्री, मप्र में 8 नए मदर मिल्क बैंक शुरू करने की तैयारी, 240 लीटर मां का दूध हो सकेगा स्टोर
फाइल फोटो

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। नवरात्रि में मां दुर्गा के जीवनदायिनी स्वरूप की आराधना होती है। मां का ममत्व भी जीवन देने और उसे संवारने की ऐसी ही शक्ति है। एक मां अपने बच्चे को जन्म देकर उसे जीवन देती है, लेकिन कुछ माताएं अपने अतिरिक्त दूध से अनजान शिशुओं के लिए भी जीवनदात्री बनेंगी। इन मांओं का दूध सुरक्षित तरीके से एकत्र कर उन नवजातों तक पहुंचाया जाता है, जिन्हें अपनी मां का दूध नहीं मिल पा रहा। 

सात साल में 916 लीटर दून डोनेट किया

मालूम हो कि प्रदेश में पिछले सात साल में करीब 3,930 माताओं ने 916 लीटर से अधिक दूध दान किया, जिससे लगभग 6,100 शिशुओं की जान बचाई जा सकी। अब इस महीने भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश में आठ नए मदर मिल्क बैंक काम करने लगेंगे। प्रत्येक नए बैंक में 30 लीटर दूध यानि कुल 240 लीटर मां का दूध संग्रहित करने की क्षमता होगी। नवरात्रि के अवसर पर यह पहल मातृत्व के उस त्याग और करुणा को सामने लाती है, जिसमें एक मां का अतिरिक्त दूध किसी दूसरे परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद बन जाता है।

इन जिलों में होंगे शुरू

  • भोपाल के जीएमसी (हमीदिया अस्पताल)
  • जबलपुर
  • रीवा
  • खरगोन
  • मुरैना
  • बड़वानी
  • विदिशा
  • खंडवा

जब दूसरी मां के दूध से मिली नन्ही जान को ताकत

भोपाल में 23 वर्षीय एक ज्योति ने समय से पहले बच्चे को जन्म दिया। बच्चे का वजन 710 ग्राम था। बच्चे की स्थिति को देखकर उसे एनआईसीयू में भर्ती करना पड़ा। कुछ दिनों में उसका वजन घटकर 610 ग्राम रह गया, इधर ज्योति का दूध भी पर्याप्त नहीं हो पा रहा था। ऐसे में मदर मिल्क बैंक से सुरक्षित डोनर मिल्क दिया गया। इसके बाद बच्चे का वजन बढ़कर 1,155 ग्राम तक पहुंचा।

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जांच से लेकर सुरक्षित भंडारण तक, ऐसे काम करता है बैंक

मदर मिल्क बैंक में दूध देने वाली मां की स्वास्थ्य जांच और आवश्यक स्क्रीनिंग की जाती है। दूध को नियंत्रित तापमान पर संग्रहित और सुरक्षित रखा जाता है। दिए गए विवरण के अनुसार, दूध को पहले 62.5 डिग्री सेल्सियस पर 30 मिनट तक पाश्चराइज किया जाता है, फिर ठंडा कर सुरक्षित तापमान पर स्टोर किया जाता है। जरूरतमंद नवजातों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार दूध उपलब्ध कराया जाता है।

विशेषज्ञ ने बताया, नवजातों के लिए क्यों जरूरी है मां का दूध 

एनएचएम के पूर्व डायरेक्टर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शुक्ला का कहना है कि समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों के लिए मां का दूध विशेष महत्व रखता है। जब अपनी मां का दूध उपलब्ध नहीं होता, तब जांच के बाद सुरक्षित किया गया डोनर ह्यूमन मिल्क महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है।

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नए मदर मिल्क बैंक से शिशुओं को फायदा होगा

एनएचएम की एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने कहा कि वर्तमान में मदर मिल्क बैंक की सफलता को आगे बढ़ाया जा रहा है। जल्द ही नए मदर मिल्क बैंक शुरू होने से उन शिशुओं को फायदा होगा जिन्हें किन्ही कारणों से मां का दूध नहीं मिल पाता।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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