छिंदवाड़ा सांसद विवेक साहू ने रामलीला में निभाई केवट की भूमिका, अयोध्या में मंचन के दौरान बन चुके हैं जनक

छिंदवाड़ा। सनातन संस्कृति के जीवंत प्रतीक ऐतिहासिक श्रीरामलीला मंडल छिंदवाड़ा के 138वें वर्ष के मंचन में इस बार एक विशेष और गौरवशाली प्रसंग जुड़ गया। रविवार रात आयोजित श्रीरामलीला में सांसद बंटी विवेक साहू ने केवट प्रसंग में केवट की मार्मिक और भावपूर्ण भूमिका निभाई। प्रभु श्रीराम के चरणों में अटूट श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का यह दृश्य कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गया। सांसद को अभिनय करते देखने के लिए दर्शकों की संख्या अप्रत्याशित रही। बंटी विवेक साहू द्वारा केवट की भूमिका निभाए जाने पर शहर के कलाकारों, पदाधिकारियों, विभिन्न समाजसेवियों और मंचन के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित धर्मप्रेमी जनता में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला।
पिछले वर्ष निभाई थी राजा जनक की भूमिका
उल्लेखनीय है कि सांसद साहू का श्रीरामलीला मंचन से पुराना, गहरा और अटूट नाता रहा है। वे पिछले वर्ष छिंदवाड़ा के मंच पर माता सीता के पिता राजा जनक की गरिमामयी भूमिका निभा चुके हैं। उनकी यह कलात्मक निष्ठा केवल स्थानीय मंच तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि पिछले वर्ष पावन नगरी अयोध्या धाम की राम की पैड़ी में आयोजित ऐतिहासिक मंचन के दौरान भी उन्होंने राजा जनक की भूमिका को जीवंत कर अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया था।
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चार पीढ़ियों से श्रीरामलीला मंडल से जुड़ा साहू परिवार
साहू परिवार का सांस्कृतिक जुड़ाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका पूरा परिवार चार पीढ़ियों से श्रीरामलीला मंडल और इस महान अनुष्ठान की सेवा में समर्पित रहा है। पारिवारिक विरासत के इस क्रम में सांसद साहू के दादाजी स्वर्गीय जय शंकर साहू ने संस्था के अध्यक्ष पद पर रहते हुए मंडल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया था। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनके पिता नरेंद्र साहू वर्तमान में संस्था के संरक्षक के रूप में मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। वे हर वर्ष लीला के सुचारू संचालन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
युवा पीढ़ी भी निभा रही सांस्कृतिक परंपरा
इस सांस्कृतिक परंपरा की अगली और युवा कड़ी के रूप में सांसद बंटी विवेक साहू के सुपुत्र वंश साहू ने भी श्रीरामलीला मंचन में अभिनय कर अपनी कला का परिचय दिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि यह प्रतिष्ठित परिवार पीढ़ियों से धर्म, कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित है। एक ही परिवार की चार पीढ़ियों का यह समर्पण दर्शाता है कि छिंदवाड़ा की श्रीरामलीला केवल एक नाट्य मंचन मात्र नहीं, बल्कि यहां के जन-जन की आस्था से जुड़ी एक पवित्र सांस्कृतिक परंपरा है।




















