दमोह में 3,200 मछुआ परिवारों की जिम्मेदारी सिर्फ 7 कर्मचारियों पर, मत्स्य विभाग में पद खाली

दमोह जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मछुआ परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की जिम्मेदारी मत्स्योद्योग विभाग के महज सात कर्मचारियों पर है। जिले में तालाबों के प्रबंधन, मत्स्य बीज उत्पादन, मछुआ समितियों से समन्वय और हितग्राहियों को तकनीकी मार्गदर्शन देने जैसे कई काम इसी सीमित अमले को संभालने पड़ रहे हैं। विभाग में स्वीकृत पदों के खाली रहने से मैदानी निगरानी और कार्यालयीन कामकाज का दबाव बढ़ गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार, दमोह में 68 पंजीकृत मछुआ समितियों से करीब 3,200 परिवार जुड़े हैं। इनके हितों का ध्यान रखने के साथ जिले के अलग-अलग जलाशयों और मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों से संबंधित गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी भी विभाग के पास है।
सैकड़ों तालाब और 33 मत्स्य नर्सरियां
दमोह जिले में मत्स्य विभाग के अंतर्गत 95 सिंचाई तालाब, 648 ग्रामीण तालाब और 190 निजी एवं अन्य तालाब हैं। इसके अलावा तीन मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों में 33 नर्सरियां संचालित की जा रही हैं। इतने बड़े नेटवर्क के संचालन के लिए नियमित निगरानी, तकनीकी सहायता और विभागीय समन्वय की जरूरत होती है। इसके बावजूद विभाग में कर्मचारियों की संख्या सीमित है। ऐसे में तालाबों की देखरेख से लेकर मछुआ समितियों की समस्याओं और योजनाओं से जुड़े कामों तक की जिम्मेदारी मौजूदा कर्मचारियों को ही निभानी पड़ रही है।
स्वीकृत पद खाली, मैदानी काम पर भी असर
विभागीय जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में सहायक संचालक, सहायक मत्स्य अधिकारी, सहायक ग्रेड-तीन, वाहन चालक, चौकीदार और मत्स्य जमादार सहित कुल सात कर्मचारी कार्यरत हैं। स्वीकृत पदों में सहायक मत्स्य अधिकारी का एक पद और मत्स्य निरीक्षक के तीनों पद खाली हैं। इसके अलावा सहायक ग्रेड-दो का एक, सहायक ग्रेड-तीन का एक और भृत्य का एक पद रिक्त है। मत्स्य जमादार के चार स्वीकृत पदों में से तीन खाली हैं, जबकि चौकीदार के तीन में से दो पदों पर नियुक्ति नहीं है। कर्मचारियों की कमी के कारण मैदानी निरीक्षण, तालाबों की निगरानी, हितग्राहियों से संपर्क और कार्यालयीन जिम्मेदारियों को पूरा करने का दबाव सीमित अमले पर है।
6 साल में 16 से घटकर सात रह गए कर्मचारी
वर्ष 2019-20 में दमोह के मत्स्य विभाग में कुल 16 कर्मचारी कार्यरत थे। उस समय तीन सहायक मत्स्य अधिकारी, दो मत्स्य निरीक्षक, दो सहायक ग्रेड-तीन कर्मचारी, तीन चौकीदार, तीन भृत्य, दो मत्स्य जमादार और एक वाहन चालक पदस्थ थे। वर्तमान में कर्मचारियों की संख्या घटकर सात रह गई है। यानी छह साल के अंतराल में विभाग के कार्यबल में नौ कर्मचारियों की कमी आई है। दूसरी ओर, तालाबों के प्रबंधन, मछुआ समितियों से समन्वय और हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने जैसी जिम्मेदारियां बनी हुई हैं।
मछली पालन से लेकर परिवहन तक की जिम्मेदारी
मत्स्य विभाग का काम केवल कार्यालयीन गतिविधियों तक सीमित नहीं है। विभाग को मछुआरों को मछली पालन, मत्स्याखेट, मछली विक्रय और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग देना होता है। मत्स्य बीज उत्पादन और पालन के लिए भी तकनीकी सहायता की जरूरत होती है। इसके अलावा छोटे तालाबों में मछली पालन के लिए मार्गदर्शन देना, सरकारी योजनाओं का संचालन करना, हितग्राहियों की समस्याओं का निराकरण करना, विभागीय बैठकों में शामिल होना और मैदानी निरीक्षण करना भी कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 के अंतर्गत संबंधित कार्यों का क्रियान्वयन भी विभागीय दायित्वों में शामिल है।
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शिकायतों और आवेदनों के समाधान की कोशिश
कर्मचारियों की कमी के बावजूद विभाग का कहना है कि मछुआरों की शिकायत या योजना का लाभ लेने संबंधी आवेदन मिलने पर समाधान की कोशिश की जाती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारी से दूरभाष पर संपर्क कर हितग्राही के सामने ही आवेदन तैयार कराने और समस्या के निराकरण का प्रयास किया जाता है। हालांकि लगातार बनी हुई जिम्मेदारियों और रिक्त पदों को देखते हुए विभाग में पर्याप्त तकनीकी और कार्यालयीन कर्मचारियों की जरूरत महसूस की जा रही है।
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भर्ती से योजनाओं के क्रियान्वयन को मिल सकती है गति
दमोह में हजारों परिवारों की आजीविका मत्स्य पालन से जुड़ी है। जिले में सैकड़ों तालाबों और मत्स्य बीज नर्सरियों का नेटवर्क भी है। ऐसे में पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता से मैदानी निगरानी, मछुआरों को तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद मिल सकती है।




















