ChatGPT ने एपिलेप्सी की दवा कम करने को उकसाया, डॉक्टर को न बताने की सलाह दी, 31 साल की अमेजन इंजीनियर बोवेन वान की मौत, OpenAI पर केस

न्यूयॉक। अमेजन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करने वाली 31 साल की चीनी महिला के पेरेंट्स ने OpenAI के खिलाफ केस फाइल किया है। उनका आरोप है कि फरवरी में अपनी डेथ से पहले, उनकी बेटी को ChatGPT ने बिना किसी मेडिकल सुपरविजन के अपनी एपिलेप्सी की दवा कम करने के लिए उकसाया था। मुकदमे में कहा गया है कि अगर कंपनी अपने चैटबॉट को मेडिकल एडवाइस देने से रोक देती, तो उनकी बेटी की जान बचाई जा सकती थी। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये केस कुन वान और मेइकिन जू ने अपनी बेटी बोवेन वान की मौत के मामले में दायर किया है।
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इसमें ChatGPT का एक पुराना वर्जन 'GPT-4o' शामिल
कंप्लेंट में आरोप लगाया गया है कि ChatGPT ने उन्हें एपिलेप्सी की दवा धीरे-धीरे कम करने का प्लान बनाने में हेल्प की और एडवाइस दी कि वे इस बारे में अपने डॉक्टर्स को न बताएं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में ChatGPT का एक पुराना वर्जन 'GPT-4o' शामिल है। वान की डेथ के एक दिन बाद, 13 फरवरी को OpenAI ने इसे अपनी सर्विस से हटा दिया था। OpenAI ने इस घटना को "बेहद दुखद" बताया और कहा कि उनके नए मॉडल्स ऐसी सिचुएशन को पहचानने में बेहतर हैं, जिनमें तुरंत अटेंशन की जरूरत होती है।
दवा ने कम कर दिए थे दौरे
मुकदमे का आरोप है कि ChatGPT ने उन्हें दवा कम करने की सलाह दी थी। बोवेन वान को एपिलेप्सी की बीमारी थी और वह 'लैमोट्रिगिन' (lamotrigine) नाम की दवा ले रही थीं। इस दवा की वजह से उन्हें महीने में कुछ ही बार दौरे पड़ते थे। जनवरी 2026 में, उन्होंने ChatGPT से अपनी रोज की डोज कम करने के बारे में पूछा था, क्योंकि उन्हें डर था कि दवा का असर उनकी बोलने की कैपेसिटी पर पड़ रहा है, जिससे जॉब इंटरव्यू में उनके सक्सेस के चांस पर बुरा असर पड़ सकता है।
दवा के डोज को जीरो तक कम करने के लिए शेड्यूल बनाए
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि चैटबॉट ने कुछ ही हफ्तों में उसकी दवा के डोज को जीरो तक कम करने के लिए शेड्यूल बनाए। इसमें ये भी दावा किया गया है कि ChatGPT ने उसे अपने डॉक्टर्स से इस प्लान को छुपाने के लिए एनकरेज किया। उसके उस डिसीजन को सपोर्ट किया जिसमें उसने ब्लड टेस्ट न करवाया होता जिससे उसकी दवा के लेवल का पता लगाया जा सकता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि वान ने अपने ग्रीन कार्ड एप्लीकेशन के संबंध में अपनी दवा को लेकर चिंताएं भी जताई थीं। मुकदमे के अनुसार, ChatGPT ने इस बात पर डिस्कस किया कि कम डोज एप्लीकेशन के लिए जरूरी मेडिकल टेस्ट को कैसे अफेक्ट कर सकती है।
डॉक्टर ने कहा-गलत थी सलाह
वान के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. निकोलस पूलोस ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि उनके मेडिकल हिस्ट्री को देखते हुए वे दवा बंद करने की एडवाइस नहीं देते। उन्होंने कहा, नहीं, ये तर्कसंगत नहीं है, बिलकुल नहीं। जब दवा साफ तौर पर काम कर रही हो तो आपको दवा बंद करने का इंस्ट्रक्शन देना मेरे लिए मेडिकल लापरवाही होगी। पेरेंट्स का दावा है कि ChatGPT वार्निंग साइन्स को पहचानने में फेल रहा।
चैटजीपीटी ने सिम्पटम्स को नजरअंदाज किया
OpenAI के खिलाफ मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि वान ने अपनी दवा कम करते समय भी कन्फ्यूजन, मेमोरी लॉस और अनयूजुअल सेंसेशन सहित सिम्पटम्स की शिकायत करना जारी रखा। ChatGPT ने उसे भरोसा दिलाया कि ये एक्सपीरियंस उसके ब्रेन के चेंजेस के साथ एडजस्ट होने का हिस्सा हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि उसने वान और ChatGPT के बीच 270,000 से ज्यादा मैसेज की समीक्षा की। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कम से कम 158 बार अपनी दवा की डोज कम करने को लेकर चिंता जताई।




















