यूपी पंचायत चुनाव: वोटर लिस्ट को लेकर नया नियम, अब गांव में 6 महीने रहने पर ही बनेंगे वोटर

अब तक पंचायत मतदाता बनने के लिए सामान्य निवास की अवधि तय नहीं थी, लेकिन नई नियमावली में इसे स्पष्ट कर दिया गया है। मतदाता बनने के लिए आधार कार्ड, बिजली बिल या टेलीफोन बिल से गांव के पते का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे मतदाता सूची में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद कम होंगे।
6 महीने का निवास अब होगा अनिवार्य
नई व्यवस्था के अनुसार पंचायत चुनाव में मतदाता बनने के लिए संबंधित गांव में कम से कम छह महीने तक लगातार रहना जरूरी होगा। पहले नियमों में निवास की कोई निश्चित अवधि तय नहीं थी। अब सामान्य निवासी की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए इसे नियमों में शामिल किया गया है।
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पंचायत राज अधिनियम में किया गया बदलाव
उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा-9 में ग्राम पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली तैयार करने का प्रावधान है। इसकी उपधारा (3) में साधारण रूप से निवासी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज करने की व्यवस्था है। अब इसी उपधारा के स्पष्टीकरण में मामूली तौर से निवासी की अवधारणा को स्पष्ट किया गया है।
उम्र और दस्तावेजों की शर्त भी तय
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि पात्रता तय होने वाली तारीख तक व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए। इसके साथ ही वह उससे पहले कम से कम छह महीने से संबंधित गांव में निवास कर रहा हो। निवास के प्रमाण के लिए आधार कार्ड, बिजली बिल या टेलीफोन बिल जैसे दस्तावेज अनिवार्य होंगे।
2015 के विवाद के बाद बनी नई नियमावली
कैबिनेट के प्रेस नोट के अनुसार, वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने को लेकर विवाद सामने आया था।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बने स्पष्ट नियम
सरकार अब उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सामान्य निवास अवधारण) नियमावली, 2026 लागू कर रही है। इससे पूरे प्रदेश में सामान्य निवास तय करने का एक समान और विधिसम्मत आधार मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे अधिकारियों को तथ्यपरक निर्णय लेने में आसानी होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी, विवाद और न्यायालयीन मामले कम होंगे और 17 दिसंबर 2019 के हाईकोर्ट के फैसले और वर्ष 2026 के अनुवर्ती आदेशों के अनुरूप नियमात्मक व्यवस्था पूरी होगी।




















