दिल्ली SIR: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से किया सवाल, दोबारा Form-6 क्यों भरें?

नई दिल्ली। कोर्ट ने पूछा कि शिफ्टेड या अनुपस्थित श्रेणी में हटाए गए करीब 43 लाख मतदाताओं को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए Form-6 भरने की जरूरत क्यों है।
पहले से वोटर, फिर नए रजिस्ट्रेशन की जरूरत क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जो लोग पहले से मतदाता सूची में शामिल थे, उन्हें अस्थायी रूप से पते पर मौजूद नहीं होने के कारण नए पंजीकरण की प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़ रहा है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया का आधार स्पष्ट करने को कहा।
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Form-6 की जगह SIR फॉर्म भरवाने की बात
याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पहले से मतदाता रहे लोगों से Form-6 भरवाना गलत घोषणा करने के लिए मजबूर करने जैसा है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों से SIR फॉर्म भरवाया जाना चाहिए, जबकि शिफ्ट होने या विवरण में बदलाव की स्थिति में Form-8 की सुविधा मिलनी चाहिए।
लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी पर बाद में होगी सुनवाई
सुनवाई के दौरान मतदाता सूची में लाखों नामों की मैपिंग नहीं होने और तार्किक विसंगतियों के आधार पर नाम हटाने का मुद्दा भी उठा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस श्रेणी की वैधता पर अभी अंतिम फैसला नहीं दिया गया है और इस पर बाद में सुनवाई होगी।
30 अक्टूबर तक दावे-आपत्तियां, 4 दिसंबर को अंतिम सूची
दिल्ली में SIR के तहत नाम जुड़वाने और दावे-आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 है, जबकि इनके निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर है। अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर को प्रकाशित होनी है, हालांकि चुनाव आयोग के रुख को देखते हुए तारीखें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।




















