नीम करोली बाबा की धूम पर क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री? बागेश्वर धाम पीठाधीश ने भक्ति को बताया ट्रेंड

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भक्ति भी अब ट्रेंड की तरह चल रही है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश ने यह बात शिवपुरी जिले के करैरा में कही। उनके मुताबिक पहले साईं बाबा की धूम थी, फिर खाटू श्याम की।अब देश-दुनिया में नीम करोली बाबा की जय-जयकार हो रही है। शास्त्री का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल है।
क्या है पूरा मामला
बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं। पीठाधीश यानी धाम की गद्दी के प्रमुख। इस बार उन्होंने आस्था के बदलते स्वरूप पर बात की। मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले का है। करैरा के 'बगीचा धाम-श्रीराम राजा सरकार धाम' में श्रीराम कथा चल रही है। यह कथा नौ दिन की है।
कथा के चौथे दिन पंडाल में हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। इसी दिन पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आस्था के बदलते रूप पर बयान दिया। यह Dhirendra Shastri Shivpuri katha अब सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा?
शास्त्री ने कहा कि आज भगवान का भी एक खास ट्रेंड चल निकला है। उनके मुताबिक भक्ति अब फैशन या सोशल मीडिया ट्रेंड जैसी हो गई है। जैसे फैशन का दौर बदलता है, वैसे ही आस्था का केंद्र भी बदलता है।
ट्रेंड यानी किसी दौर में सबसे ज्यादा चलन वाली चीज। शास्त्री ने यही शब्द भक्ति के लिए इस्तेमाल किया। आस्था का स्वरूप यानी लोग भगवान और संतों से किस तरह रिश्ता रखते हैं। शास्त्री ने इसी बदलाव पर बात की। यह बयान कथा के मंच से आया। पंडाल में श्रद्धालुओं के सामने शास्त्री ने इसे सरल शब्दों में रखा।
साईं से खाटू श्याम और नीम करोली बाबा तक
आस्था का केंद्र कैसे बदलता है? शास्त्री ने तीन नाम गिनाए। पहले साईं बाबा के दरबार में भारी संख्या में लोग पहुंचते थे। फिर Khatu Shyam बाबा की धूम मच गई। अब Neem Karoli Baba की जय-जयकार हो रही है।
कथा में उन्होंने और भी नाम लिए। उनके मुताबिक कभी हनुमान जी, शिवजी या विष्णु जी की गूंज होती है। कभी अचानक किसी सिद्ध संत के दरबार में श्रद्धालुओं का सैलाब दिखता है। शास्त्री के मुताबिक तीनों नाम अलग-अलग दौर में सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। यानी श्रद्धालुओं का रुझान समय के साथ बदलता रहा, लेकिन शास्त्री ने बात यहीं नहीं रोकी।
बागेश्वर धाम पीठाधीश की सीख क्या?
"आज हम यहां बैठकर कथा सुना रहे हैं, तो कल कोई और सुनाएगा। यह पूरा संसार परिवर्तनशील है, इसलिए मनुष्य को अपने जीवन में किसी भी चीज को लेकर अहंकार या उसके हमेशा बने रहने का भ्रम नहीं पालना चाहिए।"
- धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पीठाधीश, बागेश्वर धाम
शास्त्री ने इस बदलाव को जीवन के शाश्वत सत्य से मिलाकर समझाया। शाश्वत सत्य यानी हमेशा सच रहने वाली बात। उनके मुताबिक आज जो मंच पर है, कल कोई और होगा। अहंकार यानी खुद को सबसे ऊपर मानने की भावना। भ्रम यानी गलतफहमी। इस सीख का सार सीधा है। आज की कथा और आज का मंच कल बदल सकते हैं। इसलिए अहंकार का कोई आधार नहीं रह जाता।




















