बोमा अभियान में 1236 काले हिरण का रेस्क्यू: सीएम मोहन यादव खुद पहुंचे रंथभंवर, कैमोफ्लाज्ड मचान से देखा रेस्क्यू

शाजापुर में Helicopter deer rescue का अभियान चल रहा है। सीएम मोहन यादव 28 अक्टूबर को इसे देखने रंथभंवर गांव पहुंचे। उन्होंने कृष्ण मृग रेस्क्यू के दूसरे चरण का निरीक्षण किया। इस Blackbuck rescue का मकसद खेतों की फसल को जंगली जानवरों से बचाना है। रेस्क्यू में दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञ हेलीकॉप्टर के साथ काम कर रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
मध्य प्रदेश के शाजापुर में फसल बचाने के लिए रेस्क्यू हो रहा है। काले हिरण को Boma technique से रेस्क्यू किया जा रहा है। इसके लिए दक्षिण अफ्रीका से विशेषज्ञ बुलाए गए हैं। हेलीकॉप्टर से हांका दिया जा रहा है। हांका यानी जानवरों को हांककर एक तरफ ले जाना।
मुख्यमंत्री का यह Mohan Yadav Shajapur दौरा 28 अक्टूबर को हुआ। इस अभियान में तीन चीजें साथ चल रही हैं। हेलीकॉप्टर, बोमा तकनीक और दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञ। रंथभंवर गांव शाजापुर जिले में है। यहीं से कृष्ण मृगों का रेस्क्यू हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने रंथभंवर गांव में अभियान का दूसरा चरण देखा। उन्होंने वन विभाग और प्रशासन के अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली। व्यवस्थाओं के बारे में भी पूछा। उन्होंने कैमोफ्लाज्ड मचान (छिपाकर बनाया गया ऊंचा ठिकाना) से काम का निरीक्षण किया। यहां बोमा पद्धति से कृष्ण मृग रेस्क्यू हो रहा था। रेस्क्यू के बाद हिरणों को अभयारण्य (सुरक्षित वन क्षेत्र) भेजा जा रहा है।
बोमा तकनीक पर सीएम ने क्या कहा?
“मुझे इस बात का संतोष है कि पूरे दक्षिण एशिया में पहली बार हेलीकॉप्टर की मदद से बोमा पद्धति के आधार पर वन्यजीवों के रेस्क्यू का यह अभियान चलाया गया है। मुझे विश्वास है कि इस परियोजना की सफलता के आधार पर देश के कई अन्य राज्य और दूसरे देश भी इस पद्धति को अपनाएंगे।” मुख्यमंत्री के मुताबिक काले हिरणों को सुरक्षित रूप से पिंजरों में रखा जाता है। टीम का ध्यान है कि किसी जानवर को चोट न पहुंचे।
-मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री ने अब तक की जानकारी के आधार पर संख्या बताई। उनके मुताबिक लगभग 1,236 काले हिरण रेस्क्यू हो चुके हैं। यानी बारह सौ से ज्यादा। उनके मुताबिक कई अन्य राज्य और दूसरे देश भी इसे अपना सकते हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि उन्हें परियोजना की सफलता पर विश्वास है। यह जानकारी अब तक की है, अभियान का दूसरा चरण अभी चल रहा है।
कृष्ण मृग रेस्क्यू में 11 ट्रकों का इंतजाम
“इस काम के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। पशु चिकित्सकों, आवश्यक उपकरणों और पूरी सावधानी के साथ जानवरों को सुरक्षित रूप से ले जाने की यह व्यवस्था वास्तव में अद्भुत है।” मुख्यमंत्री ने इसे वास्तव में अद्भुत व्यवस्था कहा। उनका जोर जानवरों की सुरक्षित आवाजाही पर रहा।
किसान कल्याण वर्ष में फसल सुरक्षा
सीएम मोहन यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष पूरे प्रदेश में मनाया जा रहा है। ऐसे में हमारे किसानों की फसलों को जंगली जानवरों, खासकर काले हिरण और नीलगाय से बचाने के लिए सरकार द्वारा अफ्रीका से एक विशेष टीम बुलाई गई है।
प्रदेश में Kisan Kalyan Varsh मनाया जा रहा है। इसी के तहत फसल बचाने का यह अभियान चल रहा है। आखिर खेतों में फसल की रखवाली कैसे हो? सोचिए एक बार। जवाब में हेलीकॉप्टर, विशेषज्ञ और 11 ट्रक सामने हैं।
काले हिरण कहां भेजे जा रहे हैं?
मुख्यमंत्री के मुताबिक हिरणों को तीन जगह पहुंचाया जा रहा है। ये हैं श्योपुर के जंगल, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट (आरक्षित वन)। इस अभियान के दो पक्ष हैं। एक तरफ किसान की फसल है। दूसरी तरफ काले हिरण जैसे वन्यजीव। मुख्यमंत्री के मुताबिक दोनों का ध्यान रखा जा रहा है।
वन विभाग को बधाई और सरकार के काम
मुख्यमंत्री ने बताया कि मैं अपनी ओर से वन विभाग की पूरी टीम को बधाई देता हूं। हमारी सरकार बनने के बाद से ही हमने लगातार जनकल्याणकारी कार्यों को तेजी से धरातल पर उतारने का काम किया है। विशेष रूप से किसान कल्याण, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने तथा प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में हमने महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
मुख्यमंत्री ने सरकार के कामों की तीन दिशाएं गिनाईं। ये हैं किसान कल्याण, युवाओं का रोजगार और वन्यजीव संरक्षण। अब तक की तस्वीर साफ है। 28 अक्टूबर को मुख्यमंत्री रंथभंवर गांव पहुंचे। उनके मुताबिक लगभग 1,236 काले हिरण रेस्क्यू हुए। 11 ट्रक और पशु चिकित्सक इसमें लगे हैं।




















