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हार्ट मरीजों के लिए खुशखबरी! भोपाल एम्स में लगेगा 22 करोड़ से नया कार्डियक सेटअप, 6 अत्याधुनिक मशीनों से घटेगी मरीजों की वेटिंग

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हार्ट मरीजों के लिए खुशखबरी! भोपाल एम्स में लगेगा 22 करोड़ से नया कार्डियक सेटअप, 6 अत्याधुनिक मशीनों से घटेगी मरीजों की वेटिंग
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। राजधानी के एम्स अस्पताल से दिल की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अस्पताल में 22 करोड़ रुपए की लागत से एक नया अत्याधुनिक कार्डियक सेटअप तैयार किया जा रहा है। इसमें नई कैथ लैब समेत छह आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। इस व्यवस्था के शुरू होने के बाद मरीजों को इको और कैथ लैब की लंबी वेटिंग से राहत मिलेगी।

    वेटिंग लिस्ट होगी खत्म

    अभी एम्स भोपाल में रोजाना 250 से 300 एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर जैसी प्रक्रियाएं होती हैं। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने से वेटिंग लिस्ट भी लंबी होती जा रही थी। खासकर हार्ट अटैक और गंभीर मरीजों को कई बार ढाई से तीन महीने तक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन नए कार्डियक सेटअप से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

    पहले से मौजूद हैं दो कैथ लैब

    अस्पताल में इस समय दो कैथ लैब संचालित हो रही हैं। लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के मुकाबले ये पर्याप्त नहीं थीं। यही वजह है कि अब एक नई बाइप्लेन कार्डियक कैथेटराइजेशन लैब जोड़ी जाएगी, जिससे समय पर जांच और उपचार संभव हो सकेगा।

    लगेंगी छह अत्याधुनिक मशीनें

    नए सेटअप में दिल से जुड़ी बीमारियों की सटीक जांच और उपचार के लिए छह अत्याधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं-

    1. बाइप्लेन कार्डियक कैथेटराइजेशन लैब

    यह नई कैथ लैब हार्ट ब्लॉकेज, वॉल्व की खराबी और जन्मजात हृदय दोष के इलाज में बेहद उपयोगी होगी। बाइप्लेन तकनीक से डॉक्टर को एक ही समय में दो एंगल से इमेज मिलती है। इससे जटिल एंजियोप्लास्टी और स्टेंट डालने की प्रक्रिया और अधिक सटीक व सुरक्षित तरीके से की जा सकेगी। साथ ही दिल के छेद और वॉल्व बदलने जैसी सर्जरी भी बेहतर परिणाम देंगी।

    2. इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड सिस्टम

    यह हाई-डेफिनिशन तकनीक धमनियों के भीतर की रीयल-टाइम तस्वीर उपलब्ध कराती है। इससे ब्लॉकेज कितना गंभीर है, यह आसानी से पता चलता है और डॉक्टर तय कर सकते हैं कि मरीज को स्टेंट लगाना जरूरी है या दवा से इलाज संभव है।

    3. ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी सिस्टम

    यह सिस्टम ब्लॉकेज का 3D व्यू दिखाता है और खून के प्रवाह को मापता है। इसकी मदद से डॉक्टर यह सही फैसला कर सकते हैं कि मरीज को दवा दी जाए या सर्जरी करनी पड़े।

    4. ट्रांसईसोफेगल इकोकार्डियोग्राफी मशीन

    यह मशीन दिल की 2D, 3D और 4D तस्वीर देती है। खासकर हार्ट वाल्व और जन्मजात हृदय दोष की सर्जरी के लिए यह बेहद जरूरी है। अभी तक इस जांच के लिए मरीजों को तीन महीने तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन नई मशीन से यह परेशानी खत्म हो जाएगी।

    5. एडवांस्ड ट्रेडमिल/एक्सरसाइज टेस्टिंग विद सीपीईटी

    यह मशीन दिल और फेफड़ों की क्षमता की जांच करती है। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी की निगरानी करने में भी यह अहम भूमिका निभाएगी। वर्तमान में इस टेस्ट के लिए चार महीने तक की वेटिंग रहती है।

    6. होल्टर मशीन

    यह मशीन मरीज की धड़कनों को लगातार 24 से 48 घंटे तक रिकॉर्ड करती है। इससे अनियमित धड़कन, हार्ट रिद्म डिसऑर्डर और ब्लैकआउट जैसी समस्याओं का सही पता लगाया जा सकता है। फिलहाल इस जांच के लिए भी मरीजों को ढाई महीने तक इंतजार करना पड़ता है।

    इन मशीनों की मदद से दिल की नलियों और वॉल्व की बारीक जांच संभव होगी और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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