Naresh Bhagoria
11 Jan 2026
स्पोर्ट्स डेस्क। 2026 टी-20 वर्ल्ड कप को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को प्रस्ताव दिया है कि यदि बांग्लादेश के मैच श्रीलंका में आयोजित नहीं हो पाते हैं, तो उन्हें पाकिस्तान में कराया जा सकता है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में अपने मैच खेलने से इनकार कर दिया है।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने ICC को ई-मेल भेजकर मांग की है कि भारत में होने वाले उसके टी-20 वर्ल्ड कप मैचों का वेन्यू बदला जाए। बांग्लादेश ने पहले श्रीलंका में मैच कराने का विकल्प रखा है।
विवाद की शुरुआत IPL मिनी ऑक्शन से मानी जा रही है। 16 दिसंबर को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। इसके बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या की घटनाओं को लेकर भारत में विरोध हुआ। हालात को देखते हुए BCCI ने मुस्तफिजुर को IPL खेलने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद 3 जनवरी को KKR ने उन्हें टीम से रिलीज कर दिया।
दूसरी ओर मुस्तफिजुर को रिलीज किए जाने के बाद बांग्लादेश सरकार और BCB ने भारत में IPL के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके साथ ही भारत में टी-20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से भी बोर्ड ने इनकार कर दिया गया। जिससे दोनों देशों के बीच में तनाव बढ़ गया है। आईपीएल फ्रेंचाइजी केकआर ने BCCI के आदेश के बाद तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को पहले ही रिलीज कर दिया है।
वहीं टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में बांग्लादेश को ग्रुप-C में रखा गया है। टीम के चार मुकाबले भारत में प्रस्तावित हैं—तीन मैच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में और एक मैच मुंबई में होना है। फिलहाल PCB और ICC की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि ICC बांग्लादेश के मैच भारत में ही कराने पर कायम रहता है या फिर श्रीलंका अथवा पाकिस्तान जैसे न्यूट्रल वेन्यू पर शिफ्ट करने का फैसला लेता है।
भारत 2026 टी-20 वर्ल्ड कप का मुख्य मेजबान है और ऐसे में किसी एक टीम के लिए वेन्यू बदलना टूर्नामेंट के पूरे शेड्यूल और सुरक्षा प्लान पर असर डाल सकता है। अगर बांग्लादेश के मैच भारत से बाहर शिफ्ट किए जाते हैं, तो ICC को यात्रा, प्रसारण अधिकार, टिकटिंग और अन्य टीमों की लॉजिस्टिक्स को दोबारा व्यवस्थित करना होगा। यही वजह है कि ICC इस मुद्दे पर जल्दबाज़ी में फैसला लेने के बजाय सभी बोर्ड्स से राय लेकर संतुलित समाधान तलाश रही है।