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8 Jan 2026
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बृजेंद्र वर्मा
भोपाल। अनंत चतुर्दशी के साथ शनिवार को गणेशोत्सव का समापन हो जाएगा। शहर में करीब 500 जगहों पर गणपति के पंडाल सजे हैं। राजधानी में इस बार एक नया चलन देखने में आया है। कुछ सालों तक पीपल चौक पर विराजे गणपति को भोपाल का राजा कहा जाता था, लेकिन इस बार भोपाल के कई क्षेत्रों के लोगों ने अपने गणपति का नामकरण क्षेत्र के राजा के रूप में किया है। शहर के जिस क्षेत्र जाइए, वहां गणेश जी राजा बने हैं। करोंद जाइए तो वहां करोंद के राजा हैं, कोलार में कोलार के राजा की स्थापना की गई है। इसी तरह, छोला के राजा, बैरागढ़ के राजा और भेल सहित अन्य क्षेत्रों के राजा के रूप में गणेशजी की 20 से अधिक झांकियां सजाई गईं हैं। शहर के वरिष्ठ समाजसेवी प्रमोद नेमा बताते हैं कि शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में इस बार ही ऐसा देखने को मिल रहा है।
-राजधानी में गणेशजी की सबसे पहले झांकी पीपल चौक पर सजाई गई थी।
-भोपाल के राजा ही हर साल चलसमारोह की अगुवाई करते रहे हैं।
-शहर में 500 झांकियां, इनमें 20 ने अपने बप्पा को क्षेत्र का राजा घोषित किया।
पीपल चौक करोंद : करोंद क्षेत्र में करोंद के राजा के नाम से गणेशजी विराजित होते हैं। करोंद के राजा गणेश उत्सव समिति के अध्यक्ष दीपक जाट बताते हैं कि इस बार 22वें वर्ष करोंद के राजा के नाम से गणेश जी को विराजित किया गया है। सिंहासन में बैठे गणेशजी की आकर्षक मूर्ति के दर्शन करने बड़ी संख्या में आसपास के श्रद्धालु आए।
कोलार के राजा : मुंबई के तर्ज पर कोलार के बीमाकुंज में गणेशोत्सव में गणेशजी को विराजित किया गया है। इन्हें कोलार के राजा के नाम से जाना जाता है। डेढ़ दशक से अधिक समय से यह झांकी सजाई जा रही है।
छोला के राजा : छोला क्षेत्र में गणेश उत्सव समिति भोपाल के राजा के तर्ज पर गणेशजी की वर्षों से स्थापना कर रही है। अब श्रद्धालु छोला के राजा के नाम से छोला में विराजित होने वाले गणेशजी को पहचानते हैं।
गली-मोहल्लों में विराजे गणपति बप्पा के झांकी पंडाल पर जगह का नाम और वहां का राजा लिखा रहता है। समितियों के नाम भी जगहों के राजा के हिसाब से रखे गए हैं। जैसे कोलार लालबाग के राजा गणेश उत्सव समिति, भेल पिपलानी के राजा गणेश उत्सव समिति आदि।