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AI sings Russia’s war story: स्पॉटिफाई-यूट्यूब पर रूस समर्थक सैकड़ों गाने, यूक्रेन पर नस्लीय हमला

यूक्रेनी संस्था टेरेकॉन का खुलासा, बैलेड से लेकर हेवी मेटल तक प्रोपेगैंडा सॉन्ग, 2024 के बाद तेजी से बढ़ा ट्रेंड
AI sings Russia’s war story: स्पॉटिफाई-यूट्यूब पर रूस समर्थक सैकड़ों गाने, यूक्रेन पर नस्लीय हमला
स्पॉटिफाई-यूट्यूब पर रूस समर्थक सैकड़ों गाने, यूक्रेन पर नस्लीय हमला

कीव। रूस-यूक्रेन युद्ध में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। AI से लगातार ऐसे गाने बनाए जा रहे हैं जो रूस के हमले को जायज ठहराते हैं और यूक्रेन के खिलाफ जहर उगलते हैं। थ्रेट इंटेलिजेंस पर काम करने वाली यूक्रेन की संस्था टेरेकॉन (Terrecon) की नई रिसर्च में बड़ा खुलासा हुआ है। संस्था के मुताबिक स्पॉटिफाई, एप्पल म्यूजिक, यूट्यूब और डीजर जैसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर ऐसे सैकड़ों गाने मौजूद हैं। ये गाने सिर्फ एक जॉनर तक सीमित नहीं हैं। इनमें सॉफ्ट बैलेड से लेकर हार्ड हेवी मेटल तक हर तरह का म्यूजिक है। टेरेकॉन का कहना है कि कई गानों में रूसी सैनिकों का महिमामंडन किया गया है और जंग को पूरी तरह रूस के नजरिए से दिखाया गया है।

नस्लीय टिप्पणियां भी कीं

इतना ही नहीं, इन गानों में यूक्रेनियों के लिए अपमानजनक और नस्लीय टिप्पणियां भी की गई हैं।इनमें सबसे ज्यादा सुने जाने वाले गानों में से एक है पावर ऑफ आर्टिलरी। यह रूसी भाषा का एक रॉक सॉन्ग है, जो क्रास्नोपोल और कार्नेशन जैसे रूसी आर्टिलरी सिस्टम पर बना है।

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1000 के करीब प्रोपेगैंडा गानों की पहचान

टेरेकॉन ने बताया कि उसने ऐसे 981 गानों की लिस्ट तैयार की है, जो AI से बने हैं और रूस समर्थक युद्ध प्रचार की कैटेगरी में आते हैं। जिन गानों की रिलीज डेट का पता चला है, उनमें से ज्यादातर 2024 के बाद रिलीज हुए हैं। यह वही समय है जब सुडो और उडियो जैसे AI म्यूजिक टूल आम लोगों के लिए बड़े पैमाने पर उपलब्ध हुए थे।

सस्ते ड्रोन बनाने जैसा हो गया म्यूजिक बनाना

टेरेकॉन की फाउंडर डारिया वर्बिट्स्का के मुताबिक टेक्नोलॉजी ने म्यूजिक प्रोडक्शन को बहुत सस्ता और तेज बना दिया है। NYT को दिए इंटरव्यू में वर्बिट्स्का ने कहा, जिस तरह रूसियों ने सस्ते ड्रोन बनाने और उन्हें बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने का तरीका खोज लिया है, ठीक वैसा ही म्यूजिक में भी हो रहा है। AI के जरिए अब बड़े स्तर पर प्रोपेगैंडा फैलाया जा रहा है। रिसर्च में सामने आया कि कुछ गानों में सोवियत दौर के युद्ध गीतों की थीम को आज के मॉडर्न म्यूजिक स्टाइल में पेश किया गया है। ऐसा ही एक ट्रैक "सोल्जर्स डॉटर" है, जो एक सैनिक की मौत और उसके परिवार पर पड़ने वाले असर की कहानी कहता है। यह गाना उसके बलिदान को गर्व के तौर पर दिखाता है।

क्या क्रेमलिन का है हाथ

यह साफ नहीं है कि इन गानों को बनाने और फैलाने में रूसी सरकार की सीधी भूमिका है या नहीं। हालांकि क्रेमलिन देशभक्ति को बढ़ावा देने वाले कल्चरल प्रोजेक्ट्स को लगातार सपोर्ट करता रहा है।रूसी मीडिया के मुताबिक पिछले हफ्ते मॉस्को के इंटरनेट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के एक डायरेक्टर ने बताया कि उनके संस्थान ने युद्ध से जुड़े 350 से ज्यादा आर्टिस्टिक प्रोजेक्ट्स को फंड दिया है। यह संस्थान देश में देशभक्ति की भावना बढ़ाने के लिए क्रेमलिन के साथ मिलकर काम करता है।

AI टूल्स आसानी से बना रहे हैं वॉर सॉन्ग्स

टेरेकॉन ने यह जांचने के लिए टेस्ट किया कि क्या एआई रूस के युद्ध के नजरिए से गाने बना सकता है। रिसर्चर्स ने अमेरिका के सुडो, Udio और Google Flow Music के साथ सिंगापुर की कंपनी Mureka के टूल्स का इस्तेमाल किया। उन्होंने रूसी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रॉम्प्ट डाले, जिनमें हिंसा और अपमानजनक बातें भी शामिल थीं। कुछ प्रॉम्प्ट्स को प्लेटफॉर्म्स ने रिजेक्ट कर दिया, लेकिन इसके बावजूद टीम ऐसे गाने बनाने में कामयाब रही जो पहले से डेटाबेस में मौजूद प्रोपेगैंडा ट्रैक्स से काफी मिलते-जुलते थे। बाद में इन गानों को टेस्ट के तौर पर YouTube Music और SoundCloud पर अपलोड भी किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मॉडरेशन सिस्टम ने प्रॉम्प्ट के पूरे मतलब को समझने के बजाय सिर्फ कुछ बैन शब्दों पर ही एक्शन लिया।

अलग-अलग नियम बने चुनौती

रिसर्चर्स के मुताबिक इस समस्या की एक बड़ी वजह AI म्यूजिक सर्विस और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के अलग-अलग नियम हैं। साथ ही ऑटोमेटेड सिस्टम के लिए अलग-अलग भाषाओं के स्लैंग, हाव-भाव और आपत्तिजनक शब्दों को पकड़ना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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