रियाद। अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य में अब लेजर हथियारों को सिर्फ टेस्टिंग तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें नियमित तौर पर इस्तेमाल करने जा रही है। ड्रोन और हवा से होने वाले हमलों को रोकने के लिए ये डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस तकनीक के लिए बड़ा दांव खेला है। नई पीढ़ी के हाई-एनर्जी लेजर हथियारों के बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन के लिए करीब 50 करोड़ डॉलर का निवेश किया गया है। माना जा रहा है कि यह सस्ते और घातक ड्रोन के बढ़ते खतरे से निपटने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
Xbox जैसे कंट्रोलर से ऑपरेट होगा
सबसे चौंकाने वाली बात इसका कंट्रोलर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ ऑपरेटर लेजर सिस्टम को चलाने के लिए मॉडिफाइड Xbox जैसे गेमिंग कंट्रोलर का इस्तेमाल कर रहे हैं। भले ही यह सुनने में किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लगे, लेकिन इसके पीछे प्रैक्टिकल सोच है जो गेमिंग में भी दिखाई देती है। वर्तमान गेमिंग कंट्रोलर पहले से ही सटीक मूवमेंट, तेज रिस्पॉन्स और सटीक टारगेटिंग के लिए बनाए जाते हैं। हालांकि ज्यादातर सैनिक पहले से ही इनसे वाकिफ होते हैं। वहीं, सेना का मकसद नया और जटिल कंट्रोल सिस्टम बनाने के बजाय, एक ऐसा इंटरफेस इस्तेमाल करना है जो पहले से टेस्टेड हो, भरोसेमंद हो और ऑपरेटर तुरंत सीख सके।
वीडियो गेम जैसा दिखने से उत्सुक्ता
इसकी तुलना वीडियो गेम से होने के कारण लोगों में काफी उत्सुकता है। लेकिन यह भी सामने आया है कि बहुत एडवांस हथियारों के लिए भी ऐसे इंटरफेस की जरूरत होती है जिसे सैनिक आसानी से ऑपरेट कर सकें।
पारंपरिक हथियारों से बिल्कुल अलग
लेजर की कार्यप्रणाली हाई-एनर्जी लेजर का काम करने का तरीका मिसाइल या बंदूकों से एकदम अलग है। यह सिस्टम बिजली पैदा करता है और उसे एक बेहद फोकस्ड बीम में बदल देता है। सबसे पहले सेंसर दुश्मन के टारगेट को डिटेक्ट और ट्रैक करते हैं। उसके बाद लेजर को उस टारगेट पर लॉक किया जाता है और कुछ सेकंड तक उसी पॉइंट पर बनाए रखा जाता है, जिसे टेक्निकल भाषा में ड्वेल टाइम कहते हैं। इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम, ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी, बीम कंट्रोल और कॉम्पैक्ट लेजर में हुई नई तरक्की ने इस आइडिया को अब हकीकत बना दिया है।
बड़े पैमाने पर प्रोडक्श करने जा रहा अमेरिका
अमेरिका न सिर्फ ऑपरेशनल इलाकों में इस तकनीक का प्रदर्शन कर रहा है, बल्कि इसके बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन के लिए बड़े-बड़े कॉन्ट्रैक्ट भी दे रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि मिसाइलों का दौर खत्म हो गया है। बल्कि भविष्य का युद्ध ऐसा होगा जहां मिसाइलें, गन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और लेजर हथियार एक साथ मिलकर काम करेंगे। इसलिए सबसे बड़ा बदलाव शायद लेजर से ड्रोन गिराने की तस्वीर से कहीं बढ़कर होगा।
एयर डिफेंस का बदलेगा गणित
जब कुछ मामलों में महंगी मिसाइलों की जगह सिर्फ बिजली से चलने वाले लेजर का इस्तेमाल होगा, तो ड्रोन हमलों से बचाव की लागत, स्पीड और सस्टेनेबिलिटी पूरी तरह बदल जाएगी।