अशोक गौतम,भोपाल। अयोध्या में रामलला मंदिर बनने के बाद मध्यप्रदेश से गुजरने वाले नेशनल हाइवे बनारस-रीवा-कटनी-जबलपुर और लखनादौन (NH 30-35) पर सबसे ज्यादा वाहनों का दबाव बढ़ा है। इस NH में 10 प्रतिशत प्रति वर्ष के हिसाब से ट्रैफिक बढ़ रहा है, इसमें सबसे ज्यादा माल वाहन, व्यावसायिक टैक्सी, मिडी बस और निजी कार हैं।इनमें से 60 फीसदी वाहन प्रदेश से बाहर के होते हैं। जबकि प्रदेश से निकलने वाले अन्य एनएच में प्रति वर्ष पांच प्रतिशत के हिसाब से वाहनों में ग्रोथ हो रही है।
NH 30-35 में यह स्थिति प्रयागराज कुंभ-2025 के बाद से पैदा हुई है। यह वही मार्ग है, जिसमें पिछले वर्ष कुंभ के दौरान जगह-जगह यातायात जाम की स्थिति बनी थी। हालांकि इस मामले में एनएचएआई के अधिकारियों का कहना था कि नेशनल हाइवे में जाम जैसी स्थिति नहीं बनती है। पुलिस की बैरिकेडिंग की वजह से जगह-जगह जाम की स्थिति पैदा हुई है।
जानकारों के मुताबिक, यह हाइवे पूर्व NH-7 का एक बड़ा हिस्सा है, जो कश्मीर से कन्याकुमारी को जोड़ता है। इसके चलते इनमें सबसे ज्यादा माल वाहन गुजरते हैं। दूसरे नंबर पर राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक स्थल और सिद्धपीठ-मैहर, विंध्यवासिनी, रामलला और प्रयागराज को सीधे तौर पर जोड़ता है। मंदिर बनने के बाद इसमें ज्यादा पर्यटन हो रहा है। इसके अलावा इस हाइवे से डेढ़ सौ किलोमीटर की परिधि में बांधवगढ़ और कान्हा टाइगर रिजर्व हैं। इस रूट से 130 किलोमीटर की दूरी पर धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटक स्थल चित्रकूट भी है।
इस NH पर बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने केंद्र से बनारस, प्रयागराज को जोड़ते हुए एक हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने की मांग की है। इस संबंध में भूतल परिवहन मंत्रालय को बताया कि इस हाईवे पर प्रति वर्ष दस प्रतिशत के हिसाब से ट्रैफिक का दबाव बढ़ रहा है। रामलाल मंदिर बनने के बाद इस हाईवे में सबसे ज्यादा वाहन बनारस, प्रयागराज और अयोध्या के लिए गुजरते हैं। वर्तमान में यह मार्ग फोर लेन है, कुंभ के दौरान इसमें जगह-जगह जाम की भी स्थिति बनी थी। प्रयागराज में प्रतिवर्ष लोग माघ में कल्पवास (एक माह के लिए), अमावस्या सहित अन्य स्नान करने जाते हैं।
बनारस से जबलपुर का हाईस्पीड कॉरिडोर 390 किलोमीटर का होगा। यह पूरी तरह से डेडिकेटेड होगा। इसमें हर पचास किमी की एंट्री-एक्जिट का पॉइंट होगा। इसी से वाहन हाइवे के अंदर और बाहर निकल सकेंगे। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में काम करेगा। क्योंकि उत्तर प्रदेश से मैदा, चावल, आलू, कालीन, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम, सिलिका, फार्मा आइटम नागपुर के लिए सबसे ज्यादा परिवहन होता है। नागपुर से संतरा सहित अन्य माल परिवहन होता है।
कुंभ के बाद NH 30-35 का ट्रैफिक बहुत ज्यादा बढ़ा है। कुंभ के बाद महाराष्ट्र, साउथ ईस्ट के धार्मिक और पर्यटन स्थल के साथ ऐतिहासिक स्थलों से परिचित भी हो गए हैं। बनारस और प्रयागराज के बीचों बीच जबलपुर होते हुए एक एक हाईस्पीड कॉरिडोर की मांग लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की तरफ से मंत्रालय को की गई है।
अमृत साहू, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई, जबलपुर