Naresh Bhagoria
28 Jan 2026
भोपाल। पुणे–बारामती में बुधवार सुबह हुए विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस दर्दनाक दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित विमान में सवार सभी पांच लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई। हादसा उस वक्त हुआ जब विमान लैंडिंग से कुछ ही मिनट पहले नियंत्रण खो बैठा। विमान की कमान वरिष्ठ पायलट कैप्टन सुमित कपूर के हाथों में थी, जबकि को-पायलट के रूप में कैप्टन शांभवी पाठक अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं।

कैप्टन शांभवी पाठक का मध्यप्रदेश, विशेषकर ग्वालियर से गहरा और भावनात्मक रिश्ता रहा। उनकी स्कूली शिक्षा एयरफोर्स बाल भारती स्कूल, ग्वालियर में हुई, जहां वे वर्ष 2016 से 2018 तक पढ़ीं। यही वह दौर था जब अनुशासन, देशसेवा और उड़ान के प्रति उनका आकर्षण मजबूत हुआ। ग्वालियर की सैन्य और वायुसेना से जुड़ी संस्कृति ने उनके भीतर पायलट बनने के सपने को पंख दिए।

इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद शांभवी ने मुंबई यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और एयरोनॉटिक्स, एविएशन एवं एयरोस्पेस साइंस में बीएससी की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कमर्शियल पायलट बनने के लक्ष्य के साथ न्यूज़ीलैंड का रुख किया, जहां कड़ी ट्रेनिंग पूरी कर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त पायलट लाइसेंस हासिल किया। भारत लौटने पर उन्होंने DGCA से कमर्शियल पायलट लाइसेंस और Frozen ATPL प्राप्त किया, जो किसी भी पायलट के करियर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
शांभवी का रिश्ता केवल पढ़ाई तक ही नहीं, बल्कि प्रोफेशनल स्तर पर भी मध्य प्रदेश से बना रहा। उन्होंने मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब में असिस्टेंट फ्लाइट इंस्ट्रक्टर के रूप में सेवाएं दीं और कई नए पायलटों को प्रशिक्षण दिया। यह उनके तकनीकी कौशल के साथ-साथ जिम्मेदार और प्रेरक व्यक्तित्व को भी दर्शाता है।

उन्होंने स्पाइसजेट से एविएशन सिक्योरिटी ट्रेनिंग और जॉर्डन एयरलाइन ट्रेनिंग से A320 ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्राप्त की। अगस्त 2022 से वे VSR Ventures में फुल-टाइम फर्स्ट ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं। लियरजेट 45 जैसे हाई-परफॉर्मेंस बिज़नेस जेट को उड़ाने की जिम्मेदारी संभालना उनकी काबिलियत और भरोसे का प्रमाण था। वे विशेष रूप से VIP और चार्टर फ्लाइट्स का संचालन कर रही थीं। उन्हें 1500 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था।
शांभवी पाठक का पारिवारिक जुड़ाव ग्वालियर से आज भी बना हुआ है। उनकी दादी मीरा पाठक ग्वालियर में रहती हैं, जबकि माता-पिता वर्तमान में दिल्ली में निवास कर रहे हैं। शांभवी के पिता स्वयं पायलट रहे हैं और भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। घर में आज भी शांभवी के बचपन की कई यादगार तस्वीरें सहेजकर रखी गई हैं। दादी मीरा पाठक के अनुसार, शांभवी को बचपन से ही फाइटर प्लेन के प्रति विशेष आकर्षण था, जिसकी सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता का वायुसेना से जुड़ा जीवन रहा। इस दुखद विमान हादसे के बाद ग्वालियर में भी शांभवी पाठक को लेकर शोक और भावुकता का माहौल है। उनकी जीवन यात्रा आज गर्व की मिसाल होने के साथ-साथ एक दर्दनाक स्मृति बनकर रह गई है।