अशोक गौतम, भोपाल। मार्च 2025 में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने घोषणा की थी कि भोपाल-इंदौर के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। 31 मार्च तक इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। लोगों में उम्मीद जगी पर हुआ वही जो हर बार होता आया है। 2026 तक मास्टर प्लान का कोई अता पता नहीं।
तत्कालीन शिवराज सरकार में भी भोपाल मास्टर प्लान के लिए दावे-आपत्तियों का भी शासन स्तर पर निराकरण हो गया था, लेकिन फाइल अचानक बंद हो गई। कुछ इसी तरह की स्थिति इंदौर जिले की बनती जा रही है। मास्टर प्लान नहीं आने से शहरों में नई कॉलोनियां नहीं बन पा रही हैं, इसके चलते लोग किसानों से शहर के आसपास के गांवों में खेत का टुकड़ा लेकर शहर में घर का सपना साकार कर रहे हैं। इन लोगों को मास्टर प्लान एरिया में महंगे आवास लेना पड़ रहा है। देश की एक मात्र राजधानी भोपाल है, जहां बिना मास्टर प्लान के 20 वर्षों से शहर बसाया जा रहा है।
सरकार ने करीब 19 माह से से धारा-16 में कॉलोनी काटने की अनुमति देने पर प्रतिबंध लगा रखा है। भोपाल और इंदौर में धारा-16 के तरह कॉलोनी काटने की अनुमति करीब 200 से अधिक आवेदन लंबित हैं। धारा -16 में टाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) माध्यम से शहर के लागू मास्टर प्लान के बाहर और प्रस्तावित विकास प्लान के अंदर कालोनी काटने की अनुमति दी जाती है। यह अनुमति टीएनसीपी के आयुक्त के अनुमति से संयुक्त संचालक द्वारा जारी की जाती है।
1. बेतरतीब बस रहे शहर : मास्टर प्लान नहीं आने से शहर बेतरतीब बस रहा है। क्योंकि लोग शहरों सीमा में बस रही कालोनियां बस रही हैं। इससे शहर के सुनियोजित शहर नहीं बस पा रहा है। इसका खामियाजा नगर निगम और इन कॉलोनियों में आवास लेने वाले लोगों की होती है। क्योंकि उन्हें यह पता नहीं होता है कि उक्त कालोनी अवैध है अथवा वैध, मकान लेने और कुछ दिन रहने के बाद जब उन्हें पता चलता है कि यह कॉलोनी अवैध है तो मुश्किल में पड़ जाते हैं।
2. मेट्रापॉलिटन सिटी उलझी : मास्टर प्लान की बजह से मेट्रो की बड़ी प्लानिंग, मेट्रोपॉलिटन सिटी के बड़े प्लान इसी में उलझे हुए हैं। दोनों को जोड़ते हुए शहरों के विकास की रूप रेखा तय की जानी। सरकार भोपाल और इंदौर को मेट्रोपॉलिटन सिटी बना रही है। इसके लिए सर्वे का काम और सीमाएं तय की जाएंगी। यह काम निजी एजेंसी के माध्यम से कराया जा रहा है।
3. महंगे मिल रहे आवास : मास्टर प्लान प्रकाशित नहीं होने से लोगों को मकान महंगे मिल रहे हैं। इसकी वजह यह है कि मास्टर प्लान एरिया में अब जगह सलेक्टेड है। प्लान एरिया के बाहर सरकार धारा-16 में अनुमति नहीं दे रही है। इससे प्लान एरिया में प्रोजेक्ट 20 से 25 फीसदी तक महंगे मिल रहे है।