Manisha Dhanwani
27 Jan 2026
अक्सर लोग जब हाइपरटेंशन शब्द सुनते हैं, तो सबसे पहले यही सोचते हैं कि यह शायद ज्यादा टेंशन लेने की बीमारी होगी। नाम में “टेंशन” शब्द होने की वजह से यह भ्रम आम है। लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है। जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपरटेंशन टेंशन की नहीं बल्कि हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी है। मेडिकल भाषा में हाई ब्लड प्रेशर को ही हाइपरटेंशन कहा जाता है।
यह एक गंभीर समस्या है, जिसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती दौर में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। व्यक्ति खुद को सामान्य महसूस करता है, लेकिन शरीर के अंदर बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे दिल, दिमाग, किडनी, आंखों और नसों को नुकसान पहुंचाता रहता है।
हाइपरटेंशन दो शब्दों से मिलकर बना है-
Hyper = ज्यादा
Tension = दबाव (Pressure)
इसका सीधा अर्थ है ज्यादा दबाव, यानी जब रक्तचाप सामान्य से अधिक हो जाए, तो उसे हाइपरटेंशन कहा जाता है। यहां “टेंशन” का मतलब मानसिक तनाव नहीं, बल्कि रक्त का दबाव होता है।
हाइपरटेंशन शब्द सुनते ही बहुत से लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या यह ज्यादा टेंशन लेने की बीमारी है? नाम में “हाइपर” और “टेंशन” शब्द होने की वजह से यह भ्रम होना स्वाभाविक है कि शायद यह मानसिक तनाव से जुड़ी समस्या हो। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपरटेंशन टेंशन की नहीं बल्कि हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी है। मेडिकल भाषा में हाई ब्लड प्रेशर को ही हाइपरटेंशन कहा जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती चरण में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते।

सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg माना जाता है। लेकिन जब यह लंबे समय तक 140/90 mmHg या उससे ज्यादा बना रहता है, तो इस स्थिति को हाइपरटेंशन (High Blood Pressure) कहा जाता है। यह समस्या अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे जीवनशैली और आदतों की वजह से विकसित होती है।
हाइपरटेंशन होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं, जिनमें सबसे आम कारण ये हैं:
ज्यादा नमक का सेवन
तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा इस्तेमाल
शारीरिक गतिविधि की कमी
मोटापा
धूम्रपान और शराब की आदत
लगातार मानसिक तनाव
नींद की कमी
भागदौड़ भरी और असंतुलित जीवनशैली