Naresh Bhagoria
5 Jan 2026
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Aakash Waghmare
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भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश की नई पीढ़ी में वे वराह मिहिर, आर्यभट्ट, होमी जहांगीर भाभा, विक्रम साराभाई और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसी प्रतिभा देख रहे हैं। वे मंगलवार को क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भोपाल में आयोजित 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी–2025 का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने बाल वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि भारत आज विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बना चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विज्ञान, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान के उपयोग से भारत ने न सिर्फ अपनी वैश्विक स्थिति मजबूत की बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में भी मजबूती दिखाई है। सीएम ने कहा- 'भारत की वैज्ञानिक परंपरा बेहद समृद्ध है। हमारे प्राचीन ऋषि–मुनियों ने ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म के माध्यम से मानव जीवन के हर क्षेत्र पर प्रभाव डाला है।'
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज पूरे विश्व में योग का प्रभाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से संभव हो पाया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि साइबेरिया की बर्फीली पहाड़ियों पर जब लोग योग करते दिखते हैं, तो भारतीय संस्कृति की महिमा का अनुभव होता है। उन्होंने कहा-'चीन से लेकर पाकिस्तान तक कई मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पाकिस्तान के लोग भी योग करते हुए दिखाई देते हैं। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति का परिचायक है।'
मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा के श्लोकों का उल्लेख करते हुए कहा- “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभा…” यह श्लोक हमारे प्राचीन ज्ञान की वैज्ञानिक गहराई का द्योतक है। उन्होंने कहा कि ‘यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे’ का अर्थ समझने वाला व्यक्ति यह जान लेता है कि सूक्ष्म और स्थूल जगत का स्वरूप एक है। सीएम ने अंगदान के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि अंगदान करने वाले व्यक्ति को सम्मान देना वैज्ञानिक दृष्टिकोण का ही सम्मान है।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रदर्शनी में शामिल बच्चों की प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे उनके बीच भविष्य के वैज्ञानिकों को देख रहे हैं। उन्होंने कहा- 'आपमें से कोई वराह मिहिर होगा, कोई आर्यभट्ट, कोई होमी भाभा, कोई विक्रम साराभाई और कोई डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम।' उन्होंने यह भी कहा कि मंगल मिशन असफल होने पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से वैज्ञानिकों का उत्साह बढ़ाते हैं, वह वैज्ञानिक सोच के सम्मान का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को सलाह देते हुए कहा कि विज्ञान की गति को आगे बढ़ाने के लिए 6 गुण आवश्यक हैं- विद्या, तर्क, विज्ञान, स्मृति, तत्परता और क्रियाशीलता। उन्होंने कहा कि इन गुणों को अपनाकर देश और दुनिया के लिए नए वैज्ञानिक आयाम स्थापित किए जा सकते हैं।