Shivani Gupta
5 Jan 2026
संदीप मिश्रा, डिंडौरी। जिले में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। कहीं बच्चों को झोपड़ी में तो कहीं पेड़ नीचे पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इन स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 500 से अधिक स्कूल भवन जर्जर घोषित कर दिए गए हैं। कई गिरा दिए गए हैं, कई में क्लास बंद कर दी गईं हैं। लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। पढ़िए कुछ ऐसे ही स्कूलों की कहानी, जहां बच्चे विपरीत परिस्थितियों में पढ़ने को विवश हैं।

जिले के मेंहदवानी विकासखंड क्षेत्र का नेटी टोला में एक साल पहले स्कूल भवन को जर्जर बताकर तोड़ दिया गया। कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा-37 बच्चे कभी झोपड़ी के नीचे, कभी पेड़ की छांव में तो कभी किराए के मकान में पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल में पदस्थ शिक्षक प्रकाश राज बताते हैं कि भवन टूटने के बाद से अब तक बच्चों को स्थायी रूप से बैठकर पढ़ने की सुविधा नहीं मिली। गांव के जगत सिंह धुर्वे का कहना है कि उन्होंने स्थानीय स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार शिकायत की, लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।

समनापुर विकासखंड के ग्राम शिकारी टोला में प्राथमिक विद्यालय के बच्चों की कक्षाएं एक साल से झोपड़ी में लग रही हैं, क्योंकि स्कूल भवन जर्जर है। यहां 57 बच्चे हैं। ग्रामीण भोला सिंह ने बताया कि नए स्कूल भवन के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। छात्र-छात्राएं रितेश, रुचिका का कहना है कि झोपड़ी खुली हुई है। ठंडी हवाएं अंदर आती हैं, इससे पढ़ाई में दिक्कत होती है। इसलिए खुले में धूप में बैठकर हम लोग पढ़ाई करते हैं। हेडमास्टर उमा उपाध्याय ने बताया कि व्यवस्था दयनीय है। पर्याप्त अध्ययन सामग्री, सीट-बेंच जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने बताया कि सुविधाएं नहीं होने से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। अभिभावक और ग्रामवासी सरकार से मांग कर रहे हैं कि नया स्कूल भवन जल्द पूरा कराकर बच्चों को सुरक्षित और बेहतर पढ़ाई के माहौल में स्थानांतरित किया जाए, ताकि उन्हें झोपड़ी जैसे अस्थायी ढांचे में पढ़ने की मजबूरी से राहत मिले।

जिले के करंजिया विकासखंड अंतर्गत परसेल गांव की माध्यमिक शाला इन दिनों गांव के आरोग्य केंद्र में संचालित हो रही है। अस्पताल के छोटे-छोटे कमरों में 57 बच्चों की पढ़ाई करवाई जा रही है। इस अरोग्य केंद्र के एक कमरे में मरीजों का इलाज होता है, वहीं दो-तीन अन्य कमरों में बच्चे पढ़ाई करते हैं। मरीजों और बच्चों के आने-जाने का रास्ता एक ही है। ऐसे में इन बच्चों को संक्रमण का खतरा रहता है। हाल ही में यहां टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए शिविर का आयोजन किया गया था। छात्र शिवराज समेत अन्य का कहना है कि जगह की भारी कमी है। वे किसी तरह पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल में पदस्थ अतिथि शिक्षक सुनील कुमार ने बताया कि करीब एक साल पहले स्कूल भवन जर्जर हो गया था, जिसे सुरक्षा कारणों से डिस्मेंटल कर दिया गया। इसके बाद से मजबूरी में स्कूल का संचालन अस्पताल भवन में किया जा रहा है।
जिले के पुराने प्राथमिक- माध्यमिक 536 स्कूल भवन विहीन हैं। इसके लिए राज्य शिक्षा केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया है। जैसे ही फंड उपलब्ध होगा, भवनों का निर्माण कराया जाएगा। अभी हमने गांव के चौपाल, घरों में पढ़ाई की व्यवस्था कराई है।
अंजू पवन भदौरिया, कलेक्टर, डिंडौरी