Raipur:13 नर्सों की आधी सैलरी पर बवाल, एजेंसी पर गंभीर आरोप,महिला आयोग ने FIR के दिए निर्देश

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सुनवाई में नर्सों की सैलरी से कथित कटौती का बड़ा मामला सामने आया है। ईएसआईसी अस्पताल रायपुर में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में काम कर रहीं 13 नर्सों ने एक एजेंसी पर उनकी आधी सैलरी हड़पने का आरोप लगाया है। शिकायतों की सुनवाई के बाद महिला आयोग ने संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
13 नर्सों ने दर्ज कराई अलग-अलग शिकायत
महिला आयोग के अनुसार ईएसआईसी अस्पताल की 13 नर्सों ने अलग-अलग कुल 13 प्रकरण दर्ज कराए। नर्सों का कहना है कि करीब दो साल पहले उनकी नियुक्ति अनुग्रह प्रो. विजार्ड बिजनेस सॉल्यूशन नामक एजेंसी के माध्यम से नर्सिंग ऑफिसर के पद पर हुई थी। नर्सों के मुताबिक उनका वेतन करीब 40 हजार से 48 हजार रुपए प्रतिमाह है, लेकिन उन्हें वेतन की पूरी राशि नहीं मिल रही थी। आरोप है कि उन्हें केवल लगभग आधा वेतन ही प्राप्त होता था।
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पासबुक, चेकबुक और ATM रखने का आरोप
नर्सों ने आयोग के सामने आरोप लगाया कि एजेंसी के मालिक, ठेकेदार और सुपरवाइजर ने उनकी पासबुक, चेकबुक और ATM अपने पास रखे हुए थे। उनका दावा है कि वेतन खाते में आने के बाद एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर आधी रकम निकाल ली जाती थी। शिकायत में एजेंसी के साथ ईएसआईसी अस्पताल और यूको बैंक डीडी नगर की कथित संलिप्तता का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सुनवाई में नहीं पहुंचे अनावेदक, FIR के निर्देश
महिला आयोग के मुताबिक संबंधित अनावेदक लगातार सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने नर्सों को संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए। आयोग ने यह भी कहा कि इस मामले में नर्सों की मदद की जाएगी।
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पति से तलाक की शिकायत, हर महीने 1500 भरण-पोषण पर सहमति
सुनवाई के दौरान एक महिला ने पति पर तलाक लेकर दूसरी शादी करने और उसे भरण-पोषण नहीं देने की शिकायत की। महिला ने बताया कि दोनों का एक वर्षीय पुत्र है, जो बीमार रहता है और उसके इलाज पर काफी खर्च हो रहा है। आयोग की समझाइश के बाद पति महिला को हर महीने 1500 भरण-पोषण देने के लिए तैयार हुआ।
तलाक और एकमुश्त भरण-पोषण की मांग
एक अन्य मामले में महिला ने पति पर अपने और बच्चों का भरण-पोषण नहीं करने का आरोप लगाया। महिला ने पति से तलाक और एकमुश्त भरण-पोषण राशि की मांग की।
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद महिला को न्यायालय जाने की समझाइश दी और प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया।
मारपीट और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो का मामला
एक अन्य शिकायत में महिला ने शारीरिक शोषण, मारपीट और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो बनाए जाने का आरोप लगाया। महिला ने आयोग को बताया कि उसका मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन है। आयोग ने महिला को भरण-पोषण तथा परिवार न्यायालय में दाम्पत्य जीवन की पुनर्स्थापना के लिए धारा 9 के तहत प्रकरण दर्ज कराने की जानकारी दी। मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण आयोग ने इसे नस्तीबद्ध कर दिया।
पंचायत में प्रवेश रोका, सामाजिक बहिष्कार का आरोप
एक अन्य महिला ने शिकायत की कि उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और पंचायत में प्रवेश से कथित तौर पर अवैध रूप से रोक दिया गया। महिला ने सामाजिक बहिष्कार किए जाने का भी आरोप लगाया। इस मामले में दूसरे पक्ष ने अपनी बात रखने के लिए समय मांगा। आयोग ने प्रकरण को अगली सुनवाई के लिए सुरक्षित रखा।
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महिला आयोग की सुनवाई में 6 प्रकरणों का निराकरण
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, सदस्य सरला कोसरिया, ओजस्वी मंडावी और दीपिका शोरी ने रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों की सुनवाई की। आयोग के अनुसार इस दौरान 6 प्रकरणों का निराकरण किया गया।












