अमेरिका-ईरान जंग के बाद फिर भड़की यमन की आग :जानिए क्यों बढ़ा हूती-सऊदी संघर्ष

सना। अमेरिका- ईरान के बीच जारी जंग सीजफायर के बावजूद चल रही है। हालांकि दूसरी ओर अब एक नई जंग शुरू हो गई हैं। हालांकि जब से ये युद्ध शुरू हुआ है तभी से माना जा रहा था कि ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी इसमें हस्तक्षेप कर सकते हैं। लेकिन अब यहीं बात 5 महीने बाद अब सही होती दिख रही है। पिछले एक हफ्ते में हूतियों में सऊदी अरब और रेडी सी में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से भी कई हमले किए गए हैं। जिसके जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य संगठन ने भी हूती ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए।
हूती विद्रोही- जीजान शहर के कई ऑइल रिफानरी नष्ट किए
हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के जीजान शहर में मौजूद ऑइल रिफाइनरी को मिसाइल और ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया। बात करें हूती और सऊदी के ताजा मामले की तो यह 13 जुलाई को शुरू हुआ था। मामला कुछ हफ्ते पहले का है जहां हूती नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने इस प्लेन को यमन की राजधानी सना एयरपोर्ट पर उतरने नहीं दिया।
यमन सरकार ने इस मामले में कहा कि हूती अधिकारी यमन की राष्ट्रीय एयरलाइन से ही वापस लौटे। जबकि हूती ईरान मिलान को सीधे सना में उतारने पर अड़े रहे। इसके बाद सरकार समर्थित फोर्स ने सना एयरपोर्ट के रनवे को बम से उड़ा दिया ताकि ईरानी विमान वहां उतर न सके।
क्या ईरान ने बनाया हूतियों पर दबाव
फरवरी में जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की शुरुआत की जब हूती विद्रोही सीधे तौर पर इस युद्ध में नहीं उतरे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद उनका रूख बदल गया। कई विशेषज्ञों का इस मामले में कहना है कि ईरान ने हूतियों पर युध्द में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए अपनी बात पर अड़े रहे। हालांकि उनका कहना है कि इससे सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि हूतियों को भी फायदा मिला है। वे इस मौके का इस्तेमाल यमन में अपनी राजनीतिक पकड़ और ताकत बढ़ाने के लिए करना चाहते हैं।
चार साल बाद फिर छिड़ा युद्ध
2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच युद्धविराम हुआ था। इसके बाद बड़े स्तर पर लड़ाई रुक गई थी। हालांकि दोनों पक्षों के बीच स्थायी शांति समझौता नहीं हो सका। अब अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद हालात बदल गए हैं और दोनों के बीच फिर टकराव बढ़ने लगा है।
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सऊदी को पहले ही युद्ध में हुआ था मोटा नुकसान
सऊदी अरब करीब एक दशक तक हूती विद्रोहियों से लड़ चुका है। इस युद्ध में उसे अरबों डॉलर खर्च करने पड़े, लेकिन कोई बड़ी सैन्य सफलता नहीं मिली। इस संघर्ष से उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि भी प्रभावित हुई और यमन में युद्ध, भूख और बीमारियों के कारण लाखों लोगों की मौत हुई। इसलिए सऊदी अरब एक और लंबे युद्ध से बचना चाहता है।
अब जानें हूती विद्रोही का पक्ष
विशेषज्ञों के अनुसार, हूती विद्रोही यमन के तेल से होने वाली कमाई में बड़ा हिस्सा चाहते हैं। इसके अलावा वे देश की राजनीति में अपनी भूमिका और प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं। उनका मानना है कि सऊदी अरब पर दबाव बनाकर वे अपनी शर्तें मनवा सकते हैं।
विशेषज्ञ की क्या है राय?
यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी का कहना है कि हूती विद्रोही हर समस्या का समाधान युद्ध में देखते हैं, जबकि सऊदी अरब आर्थिक और राजनीतिक समझौते के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश करता है।











