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‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम...’ इंजीनियरिंग में आईएएस दखल पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग समेत इंजीनियरिंग विभागों में शीर्ष पदों पर IAS अधिकारियों की तैनाती को लेकर सेवानिवृत्त इंजीनियरों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य तकनीकी विशेषज्ञता का विषय है, ऐसे में इंजीनियरों की भूमिका और पदोन्नति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। रिटायर्ड इंजीनियरों ने प्रशासनिक नियंत्रण और तकनीकी विशेषज्ञता के बीच संतुलन की जरूरत बताई।
‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम...’ इंजीनियरिंग में आईएएस दखल पर उठे सवाल
जीआर पल्लित कर, सतीश चंद्र पांडे, नरेंद्र कुमार

भोपाल। मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) समेत इंजीनियरिंग से जुड़े विभागों में महत्वपूर्ण और शीर्ष पदों पर IAS अधिकारियों की तैनाती को लेकर सेवानिवृत्त इंजीनियरों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य पूरी तरह तकनीकी विषय है। इसमें डिजाइन, गुणवत्ता, तकनीकी मापदंड और खामियों की पहचान जैसे काम इंजीनियरों की विशेषज्ञता के दायरे में आते हैं। ऐसे में इंजीनियरिंग विभागों के बड़े पदों पर प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती से व्यवस्था में कितना बदलाव आया, यह सवाल बना हुआ है।

पहले शीर्ष पदों पर इंजीनियरों की रहती थी भूमिका

IAS अवार्ड ठुकरा चुके सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता जीएस पल्लितकर वर्तमान व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि पहले इंजीनियरिंग विभागों के शीर्ष पदों पर इंजीनियर ही तैनात होते थे। विभागीय बैठकों और मंचों पर भी तकनीकी अधिकारियों की अहम भूमिका रहती थी। पल्लितकर का सवाल है कि जब अब शीर्ष पदों पर IAS अधिकारियों की मौजूदगी बढ़ी है, तो इसका असर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर कितना पड़ा है? उनके मुताबिक, पहले इंजीनियरों पर काम की गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदारी और दबाव ज्यादा रहता था, जिससे लापरवाही की गुंजाइश कम होती थी।

इंजीनियर और सरकार के बीच बढ़ा एक और स्तर

पल्लितकर के अनुसार, पहले मुख्य अभियंता यानी ENC सीधे मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री के सामने तकनीकी तथ्यों के आधार पर अपनी बात रख सकते थे। इससे तकनीकी मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया सीधे आगे बढ़ती थी। उनका कहना है कि अब इंजीनियर और सरकार के बीच IAS अधिकारियों का एक अतिरिक्त प्रशासनिक स्तर बन गया है। ऐसे में तकनीकी अधिकारियों की बात को पहले जैसी प्राथमिकता और गंभीरता मिलती है या नहीं, इस पर सवाल उठ रहे हैं।

तकनीकी खामियां पकड़ना इंजीनियरों का काम

लोक निर्माण विभाग में सचिव रह चुके सेवानिवृत्त इंजीनियर सतीश चंद्र पांडे भी इंजीनियरिंग विभागों में IAS अधिकारियों की तैनाती को लेकर सवाल उठाते हैं। उनका कहना है कि विभाग की अलग-अलग शाखाओं में प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती के पीछे सरकार का उद्देश्य अभी स्पष्ट नहीं है। पांडे के मुताबिक, निर्माण कार्य में तकनीकी खामियां पकड़ना, गुणवत्ता की जांच करना और तकनीकी समाधान देना इंजीनियरों का काम है। ऐसे में सवाल है कि प्रशासनिक अधिकारी तकनीकी कमियों का आकलन किस आधार पर करेंगे।

इंजीनियरों की पदोन्नति पर भी उठे सवाल

सतीश चंद्र पांडे ने इंजीनियरों की लंबे समय से लंबित पदोन्नति को लेकर भी विभागीय ढांचे पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि प्रमोशन नहीं होने का असर इंजीनियरिंग कैडर पर पड़ा है। उनके मुताबिक, बड़े और जटिल निर्माण प्रोजेक्ट्स के लिए विशेषज्ञ इंजीनियरों की कमी महसूस हो रही है। इसी वजह से कई मामलों में सरकार को बाहरी कंसल्टेंट्स की मदद लेनी पड़ रही है।

अधिकारी बदलने से नहीं बदलता इंजीनियरिंग का काम

सेवानिवृत्त इंजीनियर नरेंद्र कुमार का कहना है कि इंजीनियरों के सामने चुनौतियां पहले भी थीं और आज भी हैं। किसी अधिकारी के आने या जाने से इंजीनियरिंग का मूल काम नहीं बदलता। निर्माण कार्यों को तय तकनीकी मानकों के अनुसार ही किया जाना होता है। उनका कहना है कि असली सवाल यह है कि मौजूदा व्यवस्था में इंजीनियर अपनी तकनीकी जिम्मेदारियों और चुनौतियों का सामना किस तरह कर रहे हैं।

प्रशासनिक नियंत्रण और तकनीकी विशेषज्ञता में संतुलन जरूरी

सेवानिवृत्त इंजीनियरों की आपत्तियों के बीच मुख्य मुद्दा प्रशासनिक नियंत्रण और तकनीकी विशेषज्ञता के बीच संतुलन का है। सवाल यह है कि इंजीनियरिंग विभागों में फैसले लेने की प्रक्रिया में तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका कितनी प्रभावी रहे और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी भी स्पष्ट रूप से तय हो।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

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