ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका!मिडिल ईस्ट में बढ़ी सैन्य तैनाती, ट्रंप ने भेजे बॉम्बर्स, वॉरशिप और स्पेशल फोर्सेस

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर सैन्य संसाधनों की तैनाती शुरू कर दी है। क्षेत्र में स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेस, एडवांस्ड बॉम्बर्स, वॉरशिप, लड़ाकू विमान और कॉम्बैट मेडिकल टीमें भेजी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल सुरक्षा बढ़ाने का कदम नहीं बल्कि संभावित बड़े सैन्य अभियान की तैयारी है।
लगातार हवाई हमलों के बाद बढ़ाई गई सैन्य ताकत
पिछले कई दिनों से ईरान पर लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं। अब अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है जिससे संकेत मिल रहे हैं कि भविष्य में कार्रवाई केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रह सकती। माना जा रहा है कि अमेरिका ईरान के साथ-साथ यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ भी बड़े अभियान की तैयारी कर रहा है।
स्पेशल फोर्स और B-1 बॉम्बर्स हाई अलर्ट पर
अमेरिका ने अपने स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेस को मिडिल ईस्ट की ओर रवाना किया है। इसके अलावा ब्रिटेन में तैनात B-1 लैंसर सुपरसोनिक बॉम्बर्स को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। लंबी दूरी तक भारी हथियार ले जाने में सक्षम ये बॉम्बर्स बड़े सैन्य ठिकानों और रणनीतिक लक्ष्यों पर हमले के लिए उपयोग किए जाते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि स्पेशल फोर्स की तैनाती इस बात का संकेत है कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर जमीनी अभियान भी शुरू कर सकता है।
17 युद्धपोत और दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात
अमेरिकी नौसेना ने भी मिडिल ईस्ट में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है। फिलहाल क्षेत्र में 17 युद्धपोत, दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, 11 डिस्ट्रॉयर और एक मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट तैनात हैं। रेड सी और फारस की खाड़ी में यह सैन्य शक्ति अमेरिका को किसी भी बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने की क्षमता देती है। हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों द्वारा तेल टैंकरों पर किए गए हमलों के बाद अमेरिकी सेना की सक्रियता और बढ़ गई है।
150 से ज्यादा कॉम्बैट मेडिक्स की तैनाती ने बढ़ाई चिंता
सबसे अहम संकेत जर्मनी के लैंडस्टुल मिलिट्री हॉस्पिटल में 150 से अधिक कॉम्बैट ट्रॉमा स्पेशलिस्ट्स की तैनाती को माना जा रहा है। यह अस्पताल मिडिल ईस्ट में घायल होने वाले अमेरिकी सैनिकों के इलाज का प्रमुख केंद्र है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में मेडिकल टीमों की तैनाती आमतौर पर लंबे या बड़े सैन्य संघर्ष से पहले की जाती है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका संभावित भारी नुकसान की स्थिति के लिए भी तैयारी कर रहा है।
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कांग्रेस से मिली 95 अरब डॉलर की मंजूरी
अमेरिकी कांग्रेस ने 95 अरब डॉलर के रक्षा और सुरक्षा पैकेज को मंजूरी दे दी है। इसमें 73 अरब डॉलर सैन्य और खुफिया गतिविधियों के लिए निर्धारित किए गए हैं। हालांकि यह प्रस्ताव बेहद कम अंतर से 216-214 वोटों से पारित हुआ, जिससे यह भी स्पष्ट हुआ कि अमेरिका के भीतर इस संभावित युद्ध को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
यदि अमेरिका ईरान या उसके सहयोगी संगठनों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। मध्य पूर्व में युद्ध बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार मार्गों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। भारत जैसे देशों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल पर निर्भर करता है।
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क्या है ट्रंप की रणनीति?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से आक्रामक विदेश नीति के समर्थक रहे हैं। मौजूदा सैन्य तैनाती को ईरान और उसके सहयोगियों के लिए सख्त संदेश माना जा रहा है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़े, तो मध्य पूर्व में व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।












