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AI Homework Impact: बेहतर होमवर्क पर खराब एग्जाम को लेकर वर्ल्ड बैंक की चेतावनी, जेनरेटिव AI से कमजोर हो रही छात्रों की सीख

वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 में खुलासा, चीन में AI यूज 0 से 80% पहुंचा तो होमवर्क 18% सुधरा पर मंथली एग्जाम में 20% गिरावट। वहीं, शिक्षक इसका इस्तेमाल करते हैं,  तो नतीजे ज्यादा अच्छे होते हैं।
AI Homework Impact: बेहतर होमवर्क पर खराब एग्जाम को लेकर वर्ल्ड बैंक की चेतावनी, जेनरेटिव AI से कमजोर हो रही छात्रों की सीख
AI in Homework

नई दिल्ली। बेहतर होमवर्क, खराब एग्जाम। वर्ल्ड बैंक के इंटरनेशनल डेटा से पता चलता है कि जेनरेटिव AI का बिना रोक-टोक इस्तेमाल छात्रों के सबमिट किए गए काम को तो बेहतर बना सकता है लेकिन, उनकी असल सीख को कमजोर कर सकता है। यह भारत जैसे देशों के लिए एक चेतावनी है क्योंकि क्लासरूम में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

चीन के छात्रों पर मिले सबसे मजबूत सबूत

वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 में जेनरेटिव AI और ज्ञान, सीखने और इंसानी स्किल्स का कमजोर होना नाम से एक अलग सेक्शन है। इसमें चेतावनी दी गई है कि ChatGPT जैसे टूल्स उस मानसिक मेहनत को कम कर सकते हैं। इससे तर्क करने, लिखने और ज्ञान हासिल करने की क्षमता बनती है। इस सेक्शन में छात्रों के सीखने के नतीजों पर भारत से जुड़ी किसी स्टडी का जिक्र नहीं है। इसका सबसे मजबूत सबूत चीन से मिलता है।

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तीन साल में 80 प्रतिशत बढ़ा यूज

7वीं से 12वीं क्लास के छात्रों पर की गई एक स्टडी में पाया गया कि 2022 और 2025 के बीच AI का इस्तेमाल लगभग शून्य से बढ़कर लगभग 80% हो गया। पहली बार इस्तेमाल के छह महीने बाद, होमवर्क के स्कोर में 18% का सुधार हुआ।  लेकिन, छात्रों ने असाइनमेंट पर कम समय बिताया, इससे क्लास में होने वाले मंथली एग्जाम के स्कोर में 20% की गिरावट आई। जिन छात्रों ने कभी-कभी AI का इस्तेमाल किया था, उनके सीनियर हाई-स्कूल और कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम में भी औसतन 5-7% कम स्कोर रहा। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस स्टडी की अभी तक पीयर-रिव्यू (विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा) नहीं हुआ है।  यह AI को अपनाने के शुरुआती दौर को दिखाती है।

मौके और जोखिम दोनों

वर्ल्ड बैंक की उस टीम के हेड गौरव नय्यर (यह रिपोर्ट तैयार करने वाले) ने कहा कि सबूत शिक्षा में मौके और जोखिम दोनों की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर छात्र सीखने की प्रक्रिया को AI पर छोड़ देते हैं तो यह एक समस्या होगी।

शिक्षक इसका इस्तेमाल करते हैं

नय्यर ने कहा-  कहा कि अब तक के सबूतों से पता चलता है कि जब छात्र सीधे AI का इस्तेमाल करने के बजाय शिक्षक इसका इस्तेमाल करते हैं,  तो नतीजे ज्यादा अच्छे होते हैं। उन्होंने अलग-अलग तरह के सीखने वालों के हिसाब से पढ़ाई को पर्सनलाइज और कस्टमाइज करने में इसके इस्तेमाल की ओर इशारा किया।

तर्कशक्ति भी कमजोर की 

वर्ल्ड बैंक की समीक्षा की गई दूसरी रिसर्च भी इसी ओर इशारा करती है। रिसर्च के लिए बड़े लैंग्वेज मॉडल का इस्तेमाल करने वाले लोगों में सोचने-समझने की कम कोशिश और कमजोर तर्कशक्ति देखी गई। स्टडीज में पाया गया कि आउटपुट की क्वालिटी बेहतर होने पर भी दिमागी कोशिश कम हो गई। यह सामने आया कि जिन छात्रों को बिना किसी रोक-टोक के AI का एक्सेस दिया गया था, टेक्नोलॉजी हटाए जाने के बाद उनका परफॉर्मेंस भी खराब रहा।

प्रोडक्टिव स्ट्रगल कम हुआ

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर छात्र होमवर्क पूरा करने के लिए AI का इस्तेमाल करते हैं, तो सीखने के लिए जरूरी प्रोडक्टिव स्ट्रगल (सीखने की प्रक्रिया में आने वाली उपयोगी चुनौती) खत्म हो सकती है। इससे तर्क करने और लिखने की बुनियादी क्षमताएं कमजोर हो सकती हैं।  चीन, घाना, नाइजीरिया, तुर्की और अमेरिका में किए गए प्रयोगों के विश्लेषण से पता चला कि AI-पावर्ड ट्यूटरिंग के 30 सेशन से कम से कम 0.56 साल की स्कूली शिक्षा के बराबर सीखने में सुधार हुआ। यह तब हुआ जबकि AI ने शिक्षकों की मदद की और शॉर्टकट से बचने के उपाय भी शामिल किए गए। रिपोर्ट में कहा गया है, AI इंसानी क्षमताओं को बढ़ा सकता है, लेकिन इसे उन प्रक्रियाओं की जगह नहीं लेनी चाहिए जिनसे ज्यादा एडवांस्ड स्किल सीखी जाती हैं।

 

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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