ईरान के खिलाफ अमेरिका का एक्शन! 75 जहाज लौटाए, होर्मुज से माइंस हटाईं, आएगा एक और एयरक्राफ्ट कैरियर

वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका असर खाड़ी के समुद्री रास्तों पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने दावा किया है कि ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी फिर लागू होने के बाद बिना अमेरिकी अनुमति के कोई जहाज ईरानी बंदरगाहों में दाखिल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने नाकाबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे 75 जहाजों को वापस लौटाया। तीन जहाजों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें निष्क्रिय करने का भी दावा किया गया है। इस बीच अमेरिका पश्चिम एशिया में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की तैयारी कर रहा है।
होर्मुज में अमेरिका की सख्ती बढ़ी
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और दूसरे सामान की आवाजाही होती है। एडमिरल कूपर के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने पिछले कई महीनों में करीब 1,500 व्यापारिक जहाजों को इस रास्ते से गुजरने में मदद की है। इन जहाजों में करीब 75 करोड़ बैरल कच्चा तेल होने का दावा किया गया है।
75 जहाजों को रास्ते से लौटाया
अमेरिकी कमांडर के अनुसार, नाकाबंदी लागू करने के दौरान 75 ऐसे जहाजों को वापस भेजा गया, जिन्होंने तय नियमों का पालन नहीं किया था। इसके अलावा तीन जहाजों को निष्क्रिय करने की कार्रवाई का भी दावा किया गया। अमेरिका का कहना है कि इन कदमों का मकसद ईरान पर दबाव बनाए रखना और समुद्री रास्ते पर अपने नियंत्रण को मजबूत करना है।
होर्मुज की माइंस हटाने का दावा
अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक और बड़ा दावा किया है। CENTCOM के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन में बिछाई गई समुद्री माइंस को हटा दिया गया है। अमेरिकी कमांडर ने इन माइंस को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जोड़ा है। उनका कहना है कि माइंस हटाने का काम बेहद जोखिम भरा था और इसमें अमेरिकी नौसेना के साथ कई सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल हुआ।
50 हजार अमेरिकी सैनिक क्षेत्र में
कूपर के मुताबिक, पश्चिम एशिया में करीब 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इनके अलावा 20 से ज्यादा युद्धपोत और सैकड़ों विमान भी अभियान का हिस्सा हैं। अमेरिकी सेना एक तरफ ईरान के खिलाफ नाकाबंदी लागू करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
अमेरिका भेजेगा एक और एयरक्राफ्ट कैरियर
ईरान के साथ तनाव के बीच अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी नौसैनिक ताकत और बढ़ा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक USS Theodore Roosevelt Strike Group आने वाले हफ्तों में सैन डिएगो से रवाना हो सकता है। इसका मकसद क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को राहत देना बताया जा रहा है।
एक कैरियर लौटेगा, दूसरा संभालेगा मोर्चा
पश्चिम एशिया में USS George Washington के पहुंचने के बाद अमेरिकी नौसेना की तैनाती पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। अब USS Theodore Roosevelt की संभावित तैनाती से लंबे समय से समुद्र में मौजूद अमेरिकी नौसैनिकों को राहत मिलने की उम्मीद है। USS Abraham Lincoln लंबे मिशन के बाद अगले चरण में क्षेत्र से हटने की तैयारी में है।
ये भी पढ़ें: 18 राज्यों में बारिश-आंधी का अलर्ट! 83 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, बिहार में बाढ़ का संकट
समुद्री रास्ते पर बढ़ता तनाव
होर्मुज में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का नया असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। इस समुद्री रास्ते से तेल की बड़ी मात्रा गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट से कच्चे तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हो सकते हैं।



















