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विंध्य सहित शहडोल संभाग में 48 घंटे से आसमानी आफत, 10 साल बाद रीवा में बाढ़ जैसे हालात

विंध्य और शहडोल संभाग में 48 घंटे से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। रीवा में 10 साल बाद बाढ़ जैसे हालात बने हैं। नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और कई गांवों का संपर्क टूट गया है। रीवा, सतना, सीधी और शहडोल में राहत-बचाव अभियान जारी है।
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विंध्य सहित शहडोल संभाग में 48 घंटे से आसमानी आफत, 10 साल बाद रीवा में बाढ़ जैसे हालात
रीवा। गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह के आवास तक पहुंचा बीहर नदी का पानी।

रीवा/सतना/सीधी/शहडोल। मध्य प्रदेश के विंध्य और शहडोल संभाग में पिछले 48 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश के चलते बाढ़ जैसे गंभीर हालात बन गए हैं। लगातार बारिश और उफनते नदी-नालों के कारण दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से टूट गया है, जबकि कई बस्तियों और बाजारों में पानी भर जाने से जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। रीवा जिले में पिछले 24 घंटे में करीब सवा सात इंच (187 मिमी) बारिश दर्ज की गई, जिससे 10 साल बाद बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। टमस और बेलन नदियां खतरे के निशान से कई फीट ऊपर बह रही हैं, जबकि बीहर नदी के सभी 18 गेट और बकिया बराज के 14 गेट खोल दिए गए हैं। तराई क्षेत्र के करीब 150 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं और 50 से अधिक गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क टूट चुका है।

गुढ़ विधायक के आवास में भरा पानी

बीहर नदी किनारे स्थित गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह के आवास के निचले हिस्से में पानी भरने से विधायक सपरिवार दूसरी मंजिल पर फंसे रहे। प्रशासन और एसडीईआरएफ की टीमों ने अब तक 136 से अधिक लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला है, जबकि 2200 से अधिक प्रभावितों को 27 राहत शिविरों में ठहराया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से जिले के सभी स्कूलों में दो दिन का अवकाश घोषित कर दिया गया है।

मंदाकिनी खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर

उधर, सतना जिले के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बह रही है, जिससे रामघाट जलमग्न हो गया और सड़कों पर नावें चलानी पड़ीं। कोटर के अबेर गांव में तालाब की मेड़ टूटने से बस्ती में पानी घुस गया, वहीं उचेहरा में 20 लाख की लागत से बना नया रपटा पहली ही बारिश में बह गया।

सीधी में भूस्खलन से 30 गांवों का आवागमन बंद

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सीधी जिले के रामपुर नैकिन में भवरसेन पहाड़ पर भूस्खलन होने से मुख्य मार्ग पर भारी मलबा जमा हो गया, जिससे 30 गांवों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। मऊगंज के नईगढ़ी में अमृत योजना स्थल पर फंसे दो मजदूरों में से एक तेज बहाव में बह गया, जबकि तीन लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। 

शहडोल-सिंहपुर मार्ग पर उफनते नाले में फंसी बस

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शहडोल जिले में पिछले करीब 10 घंटे से तेज बारिश जारी है। बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों में उफान की स्थिति बनी हुई है। बनास नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद पुल के ऊपर से पानी बहने लगा, जिसके चलते मार्ग को बंद कर दिया गया है। शहडोल-सिंहपुर मार्ग पर उफनते नाले में फंसी यात्रियों से भरी बस से सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रशासन ने आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है। 

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मंडला में नर्मदा का वेग

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 उमरिया में आबादी के बीच घुसा मगरमच्छ, वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू  

उमरिया जिले के मानपुर में गुरुवार रात आबादी वाले इलाके में मगरमच्छ घुसने से लोगों के बीच हड़कंप मच गया। नगर परिषद मानपुर के वार्ड क्रमांक 1 स्थित ग्राम सेमरा में मगरमच्छ दिखाई दिया। स्थानीय लोगों के बीच मौजूद मगरमच्छ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग को इसकी जानकारी मिली। सूचना मिलते ही विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और रेस्क्यू टीम को तत्काल मौके पर भेजा। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों की मौजूदगी के बीच बेहद सावधानी से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। टीम ने फेंसिंग जाली की मदद से मगरमच्छ को पहले सुरक्षित तरीके से कवर किया। इसके बाद उसे नियंत्रित करते हुए वाहन में रखा गया। रेस्क्यू के बाद मगरमच्छ को मानपुर क्षेत्र से दूर बल्हौड़ स्थित सोन नदी ले जाया गया, जहां उसे उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पहुंची टीम

ग्राम सेमरा में मगरमच्छ के आबादी के बीच पहुंचने की सूचना के साथ उसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग ने तत्काल संज्ञान लिया। टीम ने बिना किसी अप्रिय घटना के मगरमच्छ को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की। मगरमच्छ जैसे बड़े और खतरनाक वन्यजीव के आबादी वाले इलाके में आने से लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में वन विभाग की टीम ने पहले स्थिति का आकलन किया और इसके बाद रेस्क्यू की कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

फेंसिंग जाली की मदद से किया गया रेस्क्यू

वनकर्मियों ने फेंसिंग जाली का इस्तेमाल करते हुए मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से कवर किया। इसके बाद उसे सावधानीपूर्वक वाहन में रखा गया। पूरी कार्रवाई के दौरान टीम ने आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने का प्रयास किया, ताकि रेस्क्यू के दौरान किसी तरह की अनहोनी न हो। मगरमच्छ को पकड़ने के बाद उसे बल्हौड़ स्थित सोन नदी ले जाया गया। वन विभाग की टीम ने नदी में उसे सुरक्षित रूप से छोड़ दिया। इस तरह आबादी वाले इलाके में पहुंचे मगरमच्छ को बिना किसी नुकसान के उसके प्राकृतिक आवास तक पहुंचाया गया।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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