उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बीच लखनऊ में बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों का सहभोज कार्यक्रम चर्चा में आ गया है। मंगलवार शाम को कुशीनगर से विधायक पीएन पाठक के सरकारी आवास पर करीब 40 ब्राह्मण विधायक और एमएलसी एकत्रित हुए। इस कार्यक्रम ने पार्टी के अंदर हलचल पैदा कर दी है।
इस कार्यक्रम को नाम सिर्फ सहभोज रखा गया था, लेकिन इसके दौरान विधायकों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। कार्यक्रम में विधायकों को लिट्टी-चोखा और मंगलवार व्रत का फलाहार परोसा गया। इस मौके पर नृपेन्द्र मिश्र के बेटे और एमएलसी साकेत मिश्र भी मौजूद थे।
इससे पहले मानसून सत्र में ठाकुर विधायकों की एकजुटता देखने को मिली थी। अब ब्राह्मण विधायकों के एकजुट होने से प्रदेश की सियासत गर्म हो गई है। सियासी जानकार इसे बीजेपी के अंदर पनप रही खिचड़ी बता रहे हैं, जो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
सहभोज में शामिल कुछ प्रमुख नाम हैं- रक्तिनाकर मिश्र, उमेश द्विवेदी (MLC), प्रकाश द्विवेदी, रमेश मिश्र, शलभमणि त्रिपाठी, विपुल दूबे, राकेश गोस्वामी, रवि शर्मा, विनोद चतुर्वेदी, संजय शर्मा, विवेकानंद पांडेय।
इसके अलावा अनिल त्रिपाठी, अंकुर राज तिवारी, साकेत मिश्र, बाबूलाल तिवारी (MLC), विनय द्विवेदी, सुभाष त्रिपाठी, अनिल पाराशर, कैलाशनाथ शुक्ला, प्रेमनारायण पांडेय, ज्ञान तिवारी, सुनील दत्त द्विवेदी, धर्मेंद्र सिंह भूमिहार (MLC) और अन्य विधायक भी मौजूद थे।
ठाकुर और अब ब्राह्मण विधायकों के एकजुट होने से बीजेपी के अंदर असंतोष नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी आलाकमान के लिए इसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले पार्टी को इन नेताओं को एकजुट करना जरूरी होगा, नहीं तो आगामी चुनाव में बीजेपी को इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है।