प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने का मामला और गहराता जा रहा है। आरोप है कि शंकराचार्य की सवारी जब वहां से लौट रही थी, तभी हंगामे को देखकर उसे दोबारा रोक दिया गया। स्थिति बिगड़ती देख जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और मेलाधिकारी ऋषिराज मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने शंकराचार्य से पैदल संगम स्नान के लिए जाने का आग्रह किया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
प्रशासन ने घसीटते हुए सभी अनुनायियों को थाने पहुंचाया
इसके बाद पुलिस बल और शंकराचार्य के अनुयायियों के बीच कई बार धक्कामुक्की हुई। काफी देर तक चले विवाद के बाद पुलिस ने एक-एक कर सभी अनुयायियों को घसीटते हुए चौकी पहुंचाया। आरोप लगाया जा रहा है कि इस दौरान पुलिस ने शंकराचार्य के शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि समेत कई संतों के साथ मारपीट की और कुछ संतों को बाल पकड़कर खींचा गया। हालात ऐसे बन गए कि दोपहर करीब 12:15 बजे शंकराचार्य पालकी पर अकेले रह गए, जिसके बाद कुछ लोगों ने पालकी को वहां से खींचकर हटा दिया।
मंडलायुक्त बोले- बिना अनुमति पहुंचे शंकराचार्य
दूसरी ओर, मंडलायुक्त ने पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन का पक्ष रखा। उनका कहना है कि अमावस्या स्नान के मद्देनजर भारी भीड़ को देखते हुए संगम क्षेत्र को ‘नो व्हीकल जोन’ घोषित किया गया था। इसके बावजूद शंकराचार्य बिना अनुमति अपने रथ या पालकी पर सवार होकर करीब 200 अनुयायियों के साथ वहां पहुंचे। मंडलायुक्त के अनुसार, संगम क्षेत्र में उस समय करोड़ों श्रद्धालु मौजूद थे और बैरियर तोड़कर आने से करीब तीन घंटे तक वापसी मार्ग अवरुद्ध रहा, जिससे आम लोगों को भारी असुविधा हुई और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी रही।




















