शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद 24 घंटे से अनशन पर!23 घंटे से कुछ नहीं खाया, कहा प्रण लेता हूं कभी भी शिविर में नहीं रहूंगा
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने का मामला और गहराता जा रहा है। आरोप है कि शंकराचार्य की सवारी जब वहां से लौट रही थी, तभी हंगामे को देखकर उसे दोबारा रोक दिया गया।
Publish Date: 19 Jan 2026, 4:11 PM (IST)Updated On: 21 Jan 2026, 10:53 AM (IST)Reading Time: 3 Minute Read
यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है। प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना लगातार जारी है। पालकी, यानी रथ यात्रा रोके जाने के विरोध में शंकराचार्य उसी स्थान पर धरने पर बैठे हैं, जहां पुलिस उन्हें छोड़कर चली गई थी। कड़ाके की ठंड के बीच उन्होंने पूरी रात अपने पंडाल में बिताई और बीते 23 घंटे से अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया है। उन्होंने पानी तक लेना बंद कर दिया है।
शंकराचार्य स्नान के लिए जब भी गए वे पालकी में ही गए हैं- अविमुक्तेश्वरानंद
सोमवार दोपहर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन पर नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि जब तक प्रशासन स्वयं आकर माफी नहीं मांगता, तब तक वे अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे और फुटपाथ पर ही रहेंगे। शंकराचार्य ने परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि इतिहास में जब भी शंकराचार्य स्नान के लिए गए हैं, वे पालकी में ही गए हैं और हर वर्ष इसी परंपरा का पालन किया जाता रहा है। उन्होंने इसे सनातन परंपराओं के सम्मान से जुड़ा विषय बताया।
क्या है पूरा मामला?
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने का मामला और गहराता जा रहा है। आरोप है कि शंकराचार्य की सवारी जब वहां से लौट रही थी, तभी हंगामे को देखकर उसे दोबारा रोक दिया गया। स्थिति बिगड़ती देख जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और मेलाधिकारी ऋषिराज मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने शंकराचार्य से पैदल संगम स्नान के लिए जाने का आग्रह किया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
प्रशासन ने घसीटते हुए सभी अनुनायियों को थाने पहुंचाया
इसके बाद पुलिस बल और शंकराचार्य के अनुयायियों के बीच कई बार धक्कामुक्की हुई। काफी देर तक चले विवाद के बाद पुलिस ने एक-एक कर सभी अनुयायियों को घसीटते हुए चौकी पहुंचाया। आरोप लगाया जा रहा है कि इस दौरान पुलिस ने शंकराचार्य के शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि समेत कई संतों के साथ मारपीट की और कुछ संतों को बाल पकड़कर खींचा गया। हालात ऐसे बन गए कि दोपहर करीब 12:15 बजे शंकराचार्य पालकी पर अकेले रह गए, जिसके बाद कुछ लोगों ने पालकी को वहां से खींचकर हटा दिया।
मंडलायुक्त बोले- बिना अनुमति पहुंचे शंकराचार्य
दूसरी ओर, मंडलायुक्त ने पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन का पक्ष रखा। उनका कहना है कि अमावस्या स्नान के मद्देनजर भारी भीड़ को देखते हुए संगम क्षेत्र को ‘नो व्हीकल जोन’ घोषित किया गया था। इसके बावजूद शंकराचार्य बिना अनुमति अपने रथ या पालकी पर सवार होकर करीब 200 अनुयायियों के साथ वहां पहुंचे। मंडलायुक्त के अनुसार, संगम क्षेत्र में उस समय करोड़ों श्रद्धालु मौजूद थे और बैरियर तोड़कर आने से करीब तीन घंटे तक वापसी मार्ग अवरुद्ध रहा, जिससे आम लोगों को भारी असुविधा हुई और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी रही।

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