Garima Vishwakarma
7 Feb 2026
Manisha Dhanwani
7 Feb 2026
Shivani Gupta
6 Feb 2026
Aakash Waghmare
6 Feb 2026
वॉशिंगटन डीसी। भारत और अमेरिका के बीच घोषित अंतरिम व्यापार समझौते ने जहां आर्थिक मोर्चे पर नई उम्मीदें जगाई हैं, वहीं इस डील के साथ सामने आई एक और बात ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस (USTR) द्वारा साझा किए गए भारत के आधिकारिक नक्शे ने पाकिस्तान को असहज कर दिया है और दक्षिण एशिया की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस नक्शे में न केवल पूरा जम्मू-कश्मीर, बल्कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चीन को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया है।
हालांकि भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता किसी बाहरी देश की मान्यता पर निर्भर नहीं करती, लेकिन अमेरिका जैसे वैश्विक ताकतवर देश द्वारा इस तरह का नक्शा जारी किया जाना कूटनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। यह कदम ऐसे समय आया है, जब भारत-अमेरिका संबंध एक बार फिर नई दिशा में आगे बढ़ते दिख रहे हैं।
भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement – ITA) के फ्रेमवर्क की घोषणा की। यह समझौता लंबे समय से चल रही व्यापारिक खींचतान के बाद सामने आया है।
इस फ्रेमवर्क के तहत-
इस डील को मार्च के मध्य तक औपचारिक रूप से साइन किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
ट्रेड डील की जानकारी साझा करते समय अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस ने भारत का एक आधिकारिक नक्शा भी जारी किया। यही नक्शा अब चर्चा का केंद्र बन गया है। इस नक्शे में पूरा जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चीन को स्पष्ट रूप से भारत का हिस्सा दिखाया गया है। यह नक्शा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसके राजनीतिक-कूटनीतिक मायने निकाले जाने लगे।
अब तक अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा जारी नक्शों में PoK जैसे विवादित क्षेत्रों को अक्सर अलग रंग, डॉटेड लाइन या विवादित क्षेत्र के तौर पर दिखाया जाता रहा है। इसका मकसद भारत और पाकिस्तान दोनों की आपत्तियों के बीच संतुलन बनाए रखना होता था।
लेकिन ट्रंप प्रशासन के दौरान जारी इस नए नक्शे में-
यही वजह है कि इसे अमेरिका के पुराने रुख से अलग माना जा रहा है।
भारत हमेशा से यह स्पष्ट करता आया है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और इस पर उसकी संप्रभुता पूरी तरह स्थापित है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) उसका वह हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है और इसे किसी भी सूरत में वैध नहीं माना जा सकता। इसी तरह भारत यह भी दोहराता रहा है कि अक्साई चिन लद्दाख का अभिन्न हिस्सा है, जिस पर चीन ने अवैध कब्जा किया हुआ है। भारत की यह स्थिति ऐतिहासिक दस्तावेजों, संवैधानिक प्रावधानों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार रखे गए आधिकारिक बयानों पर आधारित रही है।
भारत का विदेश मंत्रालय पहले भी कई बार अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और देशों द्वारा जारी नक्शों में गलत प्रस्तुति पर कड़ी आपत्ति दर्ज करा चुका है। ऐसे में अमेरिकी ट्रेड ऑफिस द्वारा जारी यह नक्शा भारत की लंबे समय से उठाई जा रही आपत्तियों को स्वीकार करने जैसा माना जा रहा है।
यह नक्शा पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। PoK को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है। पाकिस्तान इसे ‘आजाद कश्मीर’ कहता है और वहां अपनी तरह की सरकार चलाता है। हाल के महीनों में पाकिस्तान ने कूटनीतिक स्तर पर काफी सक्रियता दिखाई थी।
सेना प्रमुख असीम मुनीर तीन बार अमेरिका गए, ट्रंप से दो बार मुलाकात हुई। जून में हुई लंच मीटिंग ने काफी सुर्खियां बटोरीं। ऐसे माहौल में अमेरिका की ओर से PoK को भारत का हिस्सा दिखाना पाकिस्तान के दावों को कमजोर करता नजर आता है।
1947: विभाजन और विलय
विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत थी। पाकिस्तान समर्थित कबायली हमले के बाद महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
1947-48: पहला भारत-पाक युद्ध
युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पश्चिमी और उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया, जिसे बाद में PoK कहा गया।
1949: युद्धविराम और LoC
संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) बनी।
भारत का रुख
भारत पूरे जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न अंग मानता है और PoK को अवैध कब्जा बताता है।
पाकिस्तान का रुख
पाकिस्तान UN प्रस्तावों और जनमत संग्रह की बात करता रहा है।
अक्साई चीन लद्दाख के पूर्वोत्तर हिस्से में स्थित लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर का इलाका है। यह क्षेत्र तिब्बत को शिनजियांग से जोड़ने का अहम रास्ता देता है। चीन की सामरिक रणनीति के लिए बेहद अहम है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत आज भी इसे अपना हिस्सा मानता है और चीन के कब्जे को अवैध बताता है।
इस नक्शे को लेकर रणनीतिक विशेषज्ञों ने इसे बड़ा संकेत बताया है। रिटायर्ड मेजर गौरव आर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह अमेरिका की ओर से एक मजबूत संदेश है। एक पत्रकार ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, ट्रेड डील भले ही अहम हो, लेकिन असली गेमचेंजर यही नक्शा है, जो क्षेत्रीय राजनीति को नया मोड़ दे सकता है।
टैरिफ में बड़ी कटौती
भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैक्स 50% से घटाकर 18% किया गया।
जीरो टैरिफ सेक्टर
MSME और किसानों को फायदा
30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच।
निर्यात सेक्टर को बढ़ावा
रोजगार की संभावनाएं
महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार की उम्मीद।