उमरेठ के श्री नगर शक्ति पीठ मंदिर में स्थापित हुए 551 मनोकामना कलश, 200 साल पुराना है इतिहास
उमरेठ। नवरात्र के चलते पूरे नगर में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। नगर के प्रमुख शक्ति पीठ होने के कारण मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भव्य आरती में नगर के प्रत्येक घर से लोगों की मौजूदगी देखने को मिलती है। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर मां भवानी के जयकारों से गूंज उठता है। वहीं, युवकों द्वारा प्रतिदिन रात्रिकालीन आरती के बाद भंडारा प्रसाद का वितरण किया जा रहा है। इसमें श्रद्धालुओं को अलग-अलग प्रकार के मिष्ठान वितरित किए जा रहे हैं।
दो सौ साल से अधिक पुराना है मंदिर का इतिहास
नगर शक्ति पीठ श्रीमाता मंदिर का इतिहास दो सौ साल से अधिक पुराना बताया जाता है। मान्यता है कि पहले गांव की बस्ती महावीर मंदिर के पास थी। उस समय महामारी और हैजा जैसी घातक बीमारियां फैलने के बाद ग्रामीणों ने मां के मंदिर के पास आकर रहना शुरू किया। जनश्रुति के अनुसार, इसके बाद महामारी का प्रकोप समाप्त हो गया और यहां बस्ती का विस्तार होने लगा। मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि मां बच्चों को बुरी नजर और बाधाओं से बचाती हैं। मंदिर के पास मेघनाथ बाबा, भीमसेन बाबा और काल भैरव के प्राचीन स्थल भी हैं।
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दो दशक से अधिक समय से कलश स्थापना की परंपरा
मंदिर में पिछले दो दशकों से अधिक समय से नवरात्र के दौरान मनोकामना कलश स्थापित कर मां की ज्योत प्रज्वलित करने की परंपरा निभाई जा रही है। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर में प्रतिदिन आरती और धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। रात्रिकालीन आरती में नगरवासियों की बड़ी भागीदारी रहती है। आरती के बाद युवकों द्वारा भंडारा प्रसाद में विभिन्न प्रकार के मिष्ठान वितरित किए जाते हैं। मंदिर समिति के अनुसार, नवरात्र की नवमी पर विधि-विधान से कलशों का विसर्जन तीजा नदी में किया जाएगा।
नगर में जगह-जगह विराजीं मां दुर्गा
नवरात्र पर नगर के श्री मनोहरदास बाबा मंदिर, नागराज चौक, बड़ चौक, पेटपुरा मोहल्ला, शांति कॉलोनी, दुर्गा-काली मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर देवी प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। पेटपुरा में जय माता दी गरबा समिति द्वारा गरबा आयोजन किया जा रहा है, जिसमें नगर और आसपास के गांवों की महिलाएं भाग लेकर मां आदिशक्ति की आराधना कर रही हैं। मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। पूरे नगर में भक्ति और उत्साह का माहौल है।






















