इटारसी बस स्टैंड विवाद: विधायक सीतासरन शर्मा फैसले पर कायम, गज्जू तिवारी ने जनहित याचिका की तैयारी की
इटारसी। पुराने बस स्टैंड पर बसों की पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था बंद किए जाने को लेकर इटारसी में विवाद गहराता नजर आ रहा है। एक ओर विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने स्पष्ट किया है कि बसों का संचालन पुरानी इटारसी से ही होगा और इस फैसले में बदलाव की गुंजाइश नहीं है। वहीं, कांग्रेस सेवादल यंग ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष गजानंद तिवारी उर्फ गज्जू तिवारी ने फैसले के खिलाफ जनसमर्थन जुटाना शुरू कर दिया है। उन्होंने व्यापारियों, बस संचालकों, विद्यार्थियों के अभिभावकों और आम नागरिकों को साथ लेकर जनहित याचिका दायर करने की तैयारी शुरू की है।
पुराने बस स्टैंड पर पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था बंद करने का विरोध
पुराने बस स्टैंड पर यात्रियों के बस में चढ़ने और उतरने की सुविधा बंद किए जाने के मुद्दे पर गज्जू तिवारी ने दिल्ली से लौटने के बाद आंदोलन की रणनीति तैयार की। इसके तहत उन्होंने शहर के प्रमुख बाजारों और मार्गों पर पहुंचकर व्यापारियों से चर्चा की और इस मुद्दे पर समर्थन मांगा। तिवारी का कहना है कि अचानक पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था बंद किए जाने से स्कूली छात्र-छात्राओं, मजदूरों, किसानों, व्यापारियों और दूसरे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर छात्राओं की सुरक्षा और उनके आवागमन को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से बस संचालकों, ड्राइवरों और कंडक्टरों के सामने भी कई सवाल खड़े हुए हैं।
जनहित याचिका की तैयारी, अधिवक्ता से की चर्चा
इस मामले को लेकर गजानंद तिवारी ने कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में वे पांच जनपद स्थित साहू लॉ चैंबर पहुंचे, जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता रमेश साहू के साथ उन्होंने चर्चा की। बैठक में बस स्टैंड से जुड़े आदेश के कानूनी पहलुओं और आगे की रणनीति पर विचार किया गया। तिवारी ने कहा कि इस मुद्दे को कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से उठाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
'सर्वसम्मति किसकी थी, जनता को बताया जाए'
गज्जू तिवारी ने बस स्टैंड से संबंधित आदेश में सर्वसम्मति का उल्लेख किए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर यह सहमति किन लोगों की थी और क्या बस मालिकों, व्यापारियों, स्कूली विद्यार्थियों के अभिभावकों, मजदूरों तथा आम नागरिकों से भी राय ली गई थी? तिवारी के मुताबिक, यदि इन वर्गों को विश्वास में नहीं लिया गया, तो फैसले को सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय बताने का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन इस बारे में जनता को जानकारी दे।
नए बस स्टैंड का विरोध नहीं, पुराने स्टैंड पर सुविधा की मांग
गजानंद तिवारी ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध नए बस स्टैंड को चालू करने से नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर में यातायात व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए पुराने बस स्टैंड पर यात्रियों की पिक एंड ड्रॉप सुविधा पूरी तरह बंद करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि पुराने बस स्टैंड पर यात्रियों को बस में चढ़ने और उतरने की सुविधा मिलनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों, महिलाओं, मजदूरों, किसानों और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो। तिवारी ने इसे किसी एक व्यक्ति या संगठन का नहीं, बल्कि पूरे शहर की जनता की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों, अभिभावकों, बस संचालकों और आम नागरिकों को साथ लेकर आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा। उनका प्रयास है कि प्रशासन लोगों की समस्याओं को समझे और पुराने बस स्टैंड पर पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था दोबारा सुनिश्चित की जाए।
विधायक सीतासरन शर्मा बोले- शहर के विस्तार के लिए जरूरी फैसला
दूसरी ओर, विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा इस फैसले पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि पुराने बस स्टैंड पर पिक एंड ड्रॉप की सुविधा से यातायात व्यवस्था सुचारु नहीं हो पा रही थी। उनके मुताबिक, बसें वहां ज्यादा समय तक खड़ी रहती थीं, जिससे ट्रैफिक प्रभावित होता था। विधायक ने कहा कि व्यापारियों से चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है और बस ऑपरेटरों को भी इस बारे में समझा दिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि अब इस व्यवस्था में किसी वैकल्पिक बदलाव की गुंजाइश नहीं है। उनके अनुसार, शहर के विस्तार और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह कदम जरूरी है।
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प्रशासन के फैसले और आंदोलन पर टिकी निगाहें
इटारसी में अब पुराने बस स्टैंड पर पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था को लेकर दो अलग-अलग रुख सामने हैं। विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा जहां फैसले को शहर की यातायात व्यवस्था के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं गज्जू तिवारी इसे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध कर रहे हैं।























