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दिग्विजय सिंह के गंभीर आरोप, बोले- राम मंदिर ट्रस्ट के जमीन सौदों की जांच हो, ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा

इंदौर में दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट के जमीन सौदों और खर्चों की जांच की मांग की। SIR में गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।
दिग्विजय सिंह के गंभीर आरोप, बोले- राम मंदिर ट्रस्ट के जमीन सौदों की जांच हो, ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा
दिग्विजय सिंह का ज्ञानेश कुमार पर निशाना

इंदौर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। शनिवार को इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में सिंह ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट के जमीन सौदों, मंदिर निर्माण में खर्च और चंदे के हिसाब की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाया। सिंह के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।

राम मंदिर ट्रस्ट के जमीन सौदों पर उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े जमीन के सौदों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा से जुड़े लोगों ने एक जमीन करीब 2 करोड़ रुपये में खरीदी और अगले ही दिन उसे राम जन्मभूमि ट्रस्ट को 18 करोड़ रुपये में बेच दिया। सिंह ने इन आरोपों के आधार पर जमीन की खरीद, मंदिर निर्माण में हुए खर्च और ठेकों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के कामकाज में पारदर्शिता होनी चाहिए और जमीन से जुड़े सभी सौदों का हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़े कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों ने खर्चों तथा ठेकों को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद उन्हें उनकी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। सिंह ने संबंधित लोगों के बयानों और दस्तावेजों की जांच की मांग की।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों?

प्रेस वार्ता में दिग्विजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार राम मंदिर निर्माण से जुड़े ट्रस्ट के ट्रस्टी रहे हैं और अब मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर भी सवालों के घेरे में हैं। सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित विवादों और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-काटने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप

दिग्विजय सिंह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में मतदाताओं के नाम हटाने में गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने राजनीतिक आधार पर नाम हटाए जाने की आशंका भी जताई। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 से पहले भोपाल की नरेला विधानसभा सीट के एक मतदान केंद्र का उदाहरण देते हुए सिंह ने दावा किया कि एक ही पते पर कई मतदाताओं के नाम दर्ज थे जबकि जांच में उनमें से कुछ ही लोग वहां रहते पाए गए। उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका और राष्ट्रपति के नाम ऑनलाइन याचिका के जरिए ज्ञापन देने के अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने लोगों से इस अभियान से जुड़ने के लिए 8982121282 नंबर पर मिस्ड कॉल करने की अपील की।

राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा पर भी उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण पूरा होने से पहले ही चुनावी लाभ के उद्देश्य से प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई। इस दौरान उन्होंने धार्मिक कर्मकांडों और यजमान की परंपरा का हवाला देते हुए आयोजन पर सवाल उठाए। सिंह ने मांग की कि राम मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों और मठों की आय-व्यय व्यवस्था का नियमित और स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि चंदे और चढ़ावे का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए और धार्मिक संस्थानों में जमीन की खरीद, निर्माण कार्यों तथा ठेकों को लेकर पारदर्शिता रखी जानी चाहिए।

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RSS के सोशल मीडिया खर्च को लेकर भी सवाल

प्रेस वार्ता में सिंह ने कोरोना काल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर कथित तौर पर 7 करोड़ रुपये खर्च किए जाने संबंधी जानकारी का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संबंधित संगठन के पास घोषित बैंक खाता नहीं था, तो यह राशि किस खाते से आई। उन्होंने इस मामले में वित्तीय जांच और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई की मांग की। हालांकि इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।

राम जन्मभूमि ट्रस्ट को भंग कर रामालय ट्रस्ट बनाने की मांग

दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट को भंग कर मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी ‘रामालय ट्रस्ट’ को सौंपने का प्रस्ताव भी रखा। उनके मुताबिक, नए ट्रस्ट में विभिन्न पीठों के शंकराचार्य, रामानंद संप्रदाय के संत, निर्मोही अखाड़े और गोरखनाथ मठ के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रबंधन में धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधियों को उचित स्थान मिलना चाहिए और वित्तीय व्यवस्था की स्वतंत्र निगरानी होनी चाहिए।

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राष्ट्रपति के नाम डिजिटल याचिका अभियान का जिक्र

सिंह ने बताया कि राष्ट्रपति के नाम तैयार की गई डिजिटल याचिका में कथित वोट चोरी और चंदा चोरी के मामलों में जवाबदेही तय करने, राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कामकाज की जांच कराने और धार्मिक संस्थानों की वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी बनाने जैसी मांगें शामिल हैं।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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