Umar Khalid Sharjeel Imam Bail: दिल्ली हाईकोर्ट से उमर-शरजील को नहीं मिली राहत, तीसरी बार खारिज हुई जमानत

2020 दिल्ली दंगा मामले की बड़ी साजिश से जुड़े उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट से एक बार फिर राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। यह उनकी जमानत की तीसरी कोशिश थी। कोर्ट ने जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट के दिए आदेश और उसमें तय शर्तों को ध्यान में रखते हुए राहत देने से इनकार किया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?
उमर खालिद और शरजील इमाम ने कड़कड़डूमा कोर्ट के 4 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। ट्रायल कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने अब उनकी अपील पर भी राहत नहीं दी। रिपोर्टों के मुताबिक, हाईकोर्ट ने जनवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को ध्यान में रखा।
दिल्ली दंगा केस : उमर खालिद की जमानत पर हाईकोर्ट ने पुलिस को भेजा नोटिस, 27 अगस्त को होगी अहम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के जनवरी वाले आदेश में क्या कहा गया था?
5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को नियमित जमानत देने से इनकार किया था। उसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को सशर्त जमानत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की कथित भूमिकाओं को अलग-अलग स्तरों पर देखते हुए अपना फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह रास्ता खुला रखा गया था कि सुरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या आदेश की तारीख से एक साल पूरा होने, जो पहले हो, उसके आधार पर दोनों दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
4 जुलाई को ट्रायल कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
जनवरी के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उमर खालिद और शरजील इमाम ने दोबारा निचली अदालत में जमानत की मांग की थी। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 4 जुलाई को उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि वह उस आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है। इसके बाद दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
दिल्ली दंगा मामले में क्या है आरोप?
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश की जांच से संबंधित है। दोनों पर UAPA समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है। उमर खालिद की अपील में भी UAPA की धारा 43D(5) और NIA Act की धारा 21(4) के तहत जमानत का सवाल उठाया गया है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि जमानत पर अदालतों की टिप्पणियां अंतिम दोषसिद्धि का फैसला नहीं होतीं। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के फैसले में भी स्पष्ट किया गया था कि जमानत के स्तर पर की गई टिप्पणियों को मुकदमे के अंतिम गुण-दोष पर फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
NEET आंदोलन में नया विवाद! ‘उमर खालिद-शरजील इमाम जिंदाबाद’ के लहराए पोस्टर, पुलिस ने दर्ज की FIR
दिल्ली पुलिस ने जमानत का किया विरोध
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों की जमानत का विरोध किया। पुलिस ने अदालत के सामने उन्हें कथित साजिश का मास्टरमाइंड बताया और उनकी हिरासत को उचित ठहराया। यह पुलिस का पक्ष है, जिसे अदालत के अंतिम दोषसिद्धि के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
अब आगे क्या होगा?
उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत का मामला अभी भी व्यापक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य बेंच ने UAPA मामलों में लंबे समय तक मुकदमा लंबित रहने और जमानत के सिद्धांतों से जुड़े सवाल को बड़ी बेंच के पास भेजने की प्रक्रिया शुरू की थी।



















