NEET आंदोलन में नया विवाद!‘उमर खालिद-शरजील इमाम जिंदाबाद’ के लहराए पोस्टर, पुलिस ने दर्ज की FIR

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नया विवाद सामने आया है। प्रदर्शन के बीच एक महिला द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में पोस्टर दिखाने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान लगाए गए कुछ नारे और पोस्टर सार्वजनिक शांति भंग कर सकते थे। इसी आधार पर संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में NEET पेपर लीक के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न संगठनों के सदस्य शामिल हुए थे। इसी दौरान एक महिला कथित तौर पर ऐसे पोस्टर लेकर पहुंची, जिनमें उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में संदेश लिखे हुए थे। आरोप है कि महिला ने कुछ नारे भी लगाए, जिन्हें पुलिस ने विवादित और शांति भंग करने वाला माना। पोस्टर सामने आने के बाद प्रदर्शन स्थल पर कुछ समय के लिए माहौल गरमा गया और यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
2020 दिल्ली दंगा केस : उमर खालिद और शरजील इमाम को बड़ा झटका, कोर्ट ने खारिज की जमानत
हजारों लोग प्रदर्शन में हुए शामिल
पुलिस के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन 24 जुलाई को आयोजित किया गया था। इसकी जानकारी सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात सब-इंस्पेक्टर सुलोचना ने अपनी शिकायत में दी है। शिकायत के मुताबिक, इस प्रदर्शन का आयोजन कर्नाटक विद्यार्थी संगठन (KVS) ने किया था। प्रदर्शन का उद्देश्य दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा करना और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना था।
विवादित पोस्टर पर क्या लिखा था?
पुलिस की शिकायत के अनुसार, शाम करीब 5 बजे से 5:30 बजे के बीच एक महिला ने भीड़ के बीच कुछ पोस्टर दिखाए। आरोप है कि पोस्टरों में उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में संदेश लिखे थे। साथ ही पुलिस के खिलाफ भी एक आपत्तिजनक नारा लिखा हुआ था। पुलिस का कहना है कि ऐसे पोस्टर और नारे सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकते थे। इसी कारण मामले को गंभीरता से लिया गया।
कौन हैं उमर खालिद और शरजील इमाम?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उमर खालिद और शरजील इमाम पर विभिन्न मामलों में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कार्रवाई हुई थी। दोनों फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। इसी वजह से उनके समर्थन में पोस्टर दिखाए जाने के आरोप ने मामले को और संवेदनशील बना दिया।
मौके पर पोस्टर जब्त क्यों नहीं हो सके?
पुलिस का कहना है कि जैसे ही पुलिसकर्मी भीड़ के बीच पहुंचे, कुछ लोगों ने कथित तौर पर पोस्टर छिपा दिए। इस कारण मौके पर उन पोस्टरों को जब्त नहीं किया जा सका। हालांकि पुलिस ने पूरे घटनाक्रम को रिकॉर्ड करने वाले वीडियो और अन्य डिजिटल सबूत जुटाने शुरू कर दिए।
CCTV और वीडियो फुटेज से हुई पहचान
घटना के बाद पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके अलावा ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो की भी जांच की गई। जांच के दौरान पुलिस ने पोस्टर दिखाने वाली महिला की पहचान कर ली। पुलिस का कहना है कि महिला के बारे में जरूरी जानकारी जुटा ली गई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
किस धारा में दर्ज हुआ मामला?
शिकायत के आधार पर उप्पारपेट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 192 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा ऐसे मामलों से जुड़ी है, जिनमें दंगा या अशांति फैलाने के इरादे से उकसाने का आरोप लगाया जाता है, भले ही वास्तविक दंगा हुआ हो या नहीं।
लंबे समय तक जेल में रखना अब 'सजा' जैसा? उमर खालिद की जमानत पर SC की सख्त टिप्पणी
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सभी नागरिकों का अधिकार है, लेकिन यदि किसी गतिविधि से कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका होती है, तो पुलिस आवश्यक कानूनी कार्रवाई करती है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।











