UK में भारतीय छात्रों की बढ़ी मुश्किलें! यूनिवर्सिटीज वापस ले रहीं एडमिशन ऑफर, जानिए वजह

ब्रिटेन में पढ़ाई करने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ब्रिटेन की कई यूनिवर्सिटीज भारतीयों समेत पाकिस्तान, नाइजीरिया और बांग्लादेश के छात्रों को दिए गए एडमिशन ऑफर वापस ले रही हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटीज को डर है कि नए स्टूडेंट वीजा नियमों के कारण उनके यहां वीजा आवेदन खारिज होने की दर बढ़ सकती है। इससे उनकी मान्यता प्राप्त स्पॉन्सर बनने की अनुमति यानी स्टूडेंट स्पॉन्सर लाइसेंस पर खतरा आ सकता है।
क्या हैं ब्रिटेन के नए वीजा नियम?
ब्रिटेन सरकार ने 1 जून 2026 से यूनिवर्सिटीज के लिए स्टूडेंट वीजा आवेदन खारिज होने की दर की सीमा 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी है। यानी अब संस्थानों को वीजा रिजेक्शन रेट 5 प्रतिशत से नीचे रखने का लक्ष्य पूरा करना होगा। यदि कोई यूनिवर्सिटी बार-बार इस सीमा का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। गंभीर स्थिति में उसका स्टूडेंट स्पॉन्सर लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। इस लाइसेंस के बिना यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई के लिए जरूरी स्पॉन्सरशिप नहीं दे पाएगी। इसी डर से कुछ यूनिवर्सिटीज ऐसे छात्रों के एडमिशन ऑफर पहले ही वापस ले रही हैं, जिनके वीजा आवेदन खारिज होने की आशंका उन्हें ज्यादा लगती है।
भारतीय छात्रों के आवेदन वापस लेने के मामले बढ़े
फाइनेंशियल टाइम्स ने ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर बताया कि 2026 की पहली छमाही में ब्रिटेन के कुल स्टडी वीजा आवेदनों में से 10.5 प्रतिशत आवेदन वापस लिए गए। 2025 की इसी अवधि में यह आंकड़ा 2.3 प्रतिशत और 2023 में सिर्फ 0.4 प्रतिशत था। रिपोर्ट के मुताबिक, कई यूनिवर्सिटीज ने एडमिशन ऑफर पहले ही वापस लेने को इन मामलों में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह बताया है। भारतीय छात्रों के मामले में 2025 की पहली छमाही में स्टडी वीजा आवेदन वापस लेने की दर 1.2 प्रतिशत थी, जो 2026 की इसी अवधि में बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई।
ध्यान दें: ये आंकड़े वापस लिए गए वीजा आवेदनों के हैं, वीजा खारिज होने के नहीं। दोनों स्थितियां अलग-अलग हैं।
पाकिस्तान, बांग्लादेश और नाइजीरिया के आंकड़े भी बढ़े
रिपोर्ट में शामिल देशों में पाकिस्तान के छात्रों के स्टडी वीजा आवेदन वापस लेने की दर सबसे ज्यादा रही। जनवरी से जून 2026 के बीच यह दर 40.9 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल करीब 15 यूनिवर्सिटीज ने पाकिस्तान से छात्रों की भर्ती पूरी तरह रोक दी है।
बांग्लादेश के छात्रों के आवेदन वापस लेने की दर 7.1 प्रतिशत से बढ़कर 23.5 प्रतिशत हो गई। वहीं, नाइजीरिया के छात्रों के मामले में यह आंकड़ा 4.5 प्रतिशत से बढ़कर 22.7 प्रतिशत पहुंच गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि नए नियमों के बीच कुछ देशों के छात्रों के एडमिशन और वीजा आवेदन को लेकर यूनिवर्सिटीज ज्यादा सतर्क हो गई हैं।
यूनिवर्सिटीज ने बताई एडमिशन ऑफर वापस लेने की वजह
यूनिवर्सिटी ऑफ सुंदरलैंड के वाइस चांसलर सर डेविड बेल ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि वीजा आवेदन खारिज होने के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी के कारण यूनिवर्सिटीज को पहले से कदम उठाने पड़ रहे हैं। इनमें उन देशों से छात्रों की भर्ती कम करना भी शामिल है, जिनके आवेदनों की ज्यादा जांच हो रही है।
वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया के डिप्टी वाइस चांसलर प्रोफेसर स्टीवन मैकगायर ने बताया कि 2025 के आखिर में कुछ देशों के आवेदकों को दिए गए ऑफर वापस लेना शुरू किया गया था। ऐसा वीजा आवेदन खारिज होने के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के बाद किया गया।
आमतौर पर किसी यूनिवर्सिटी से एडमिशन ऑफर मिलने के बाद ही छात्र स्टडी वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि यूनिवर्सिटी बाद में ऑफर वापस ले लेती है, तो छात्र का वीजा आवेदन भी वापस लिया जा सकता है।
ब्रिटेन सरकार ने नियमों को जरूरी बताया
ब्रिटेन सरकार का कहना है कि इमिग्रेशन सिस्टम के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए निगरानी सख्त करना जरूरी है। माइग्रेशन और सिटिजनशिप मंत्री माइक टैप के मुताबिक, ब्रिटेन वास्तविक अंतरराष्ट्रीय छात्रों का स्वागत करता रहेगा, लेकिन स्टूडेंट वीजा का इस्तेमाल शरण मांगने या अवैध रूप से काम करने के रास्ते के तौर पर नहीं होना चाहिए।
ऐसे में ब्रिटेन में पढ़ाई की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के लिए एडमिशन ऑफर, यूनिवर्सिटी की शर्तों और वीजा प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी को ध्यान से समझना जरूरी हो गया है। हालांकि, आवेदन वापस लेने के बढ़ते आंकड़ों का यह मतलब नहीं है कि सभी भारतीय छात्रों के वीजा पर रोक लगा दी गई है।




















