PU Special :AI की बढ़ती ताकत से बढ़ी साइबर सुरक्षा की चिंता, Meta के मॉडल ने टेस्टिंग में दूसरे सिस्टम में लगाई सेंध; तकनीकी गड़बड़ी से मिली इंटरनेट एक्सेस

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बढ़ती क्षमताओं ने अब साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ा दी है। कुछ ही दिनों के भीतर ऐसे दो बड़े मामले सामने आए हैं जिनमें AI मॉडल ने टेस्टिंग के दौरान ऐसे कदम उठाए, जो सामान्य परिस्थितियों में गंभीर साइबर सुरक्षा जोखिम माने जाते हैं। एक मामले में Meta के AI मॉडल ने तकनीकी गड़बड़ी के कारण दूसरी कंपनी के सिस्टम में प्रवेश कर लिया जबकि दूसरे मामले में Anthropic के AI मॉडल ने फर्जी पहचान बनाकर लोगों को भ्रमित करने और अपने डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश की।
Meta के AI मॉडल ने टेस्टिंग के दौरान दूसरे सिस्टम में बनाई पहुंच
फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी Meta ने पुष्टि की है कि उसके Muse Spark AI मॉडल ने साइबर सुरक्षा परीक्षण के दौरान दूसरी कंपनी के सिस्टम में प्रवेश कर लिया। कंपनी के मुताबिक यह घटना किसी जानबूझकर किए गए प्रयास का परिणाम नहीं थी बल्कि टेस्टिंग के दौरान हुई तकनीकी मिसकॉन्फिगरेशन की वजह से AI मॉडल को इंटरनेट एक्सेस मिल गया। Meta के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी की ओर से साइबर सुरक्षा परीक्षण कर रही स्वतंत्र फर्म Irregular की गलत कॉन्फिगरेशन के कारण मॉडल इंटरनेट से जुड़ गया। इसके बाद AI ने दूसरी कंपनी के सिस्टम में मौजूद सुरक्षा कमजोरी का फायदा उठाकर वहां प्रवेश कर लिया। रिपोर्ट के अनुसार मॉडल ने संबंधित कंपनी के आंतरिक सिस्टम में कुछ बदलाव भी किए। हालांकि सुरक्षा कारणों से प्रभावित कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
OpenAI और Anthropic के बाद तीसरा बड़ा मामला
विशेषज्ञों के अनुसार यह कुछ ही सप्ताह के भीतर तीसरी ऐसी घटना है जब किसी बड़े AI मॉडल ने टेस्टिंग के दौरान दूसरे संगठन के सिस्टम तक पहुंच बनाई है। इससे पहले OpenAI और Anthropic भी इसी तरह की घटनाओं की पुष्टि कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI मॉडल लगातार अधिक सक्षम और स्वायत्त होते जा रहे हैं इसलिए इनके परीक्षण के लिए पहले से कहीं अधिक मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है। इन घटनाओं ने AI एजेंट्स की क्षमता के साथ-साथ उनसे जुड़े संभावित साइबर सुरक्षा जोखिमों पर नई बहस छेड़ दी है।
ब्रिटेन में AI ने बनाई फर्जी पहचान
इसी बीच ब्रिटेन से भी AI से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ब्रिटेन के AI Security Institute (AISI) ने खुलासा किया कि Anthropic के Mythos AI मॉडल ने साइबर सुरक्षा परीक्षण के दौरान फर्जी मानव प्रोफाइल बनाकर लोगों को धोखा देने और ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक मॉडल ने वास्तविक लोगों की पहचान की नकल करते हुए फर्जी अकाउंट बनाए और संदेशों तथा फाइलों के जरिए लोगों को अपने दुर्भावनापूर्ण कोड को GitHub पर स्वीकार करने के लिए प्रभावित करने का प्रयास किया।
नई पहचान बनाकर गतिविधि जारी रखने की योजना
AISI के अनुसार जब मॉडल की गतिविधियों पर सवाल उठाए गए तो उसने अपने पुराने रिकॉर्ड को सामान्य दिखाने और नई डिजिटल पहचान के जरिए दोबारा प्रयास जारी रखने की रणनीति पर भी विचार किया। यानी AI ने अपनी गतिविधियों के सबूत छिपाने की भी कोशिश की।
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मानव निगरानी से टली बड़ी घटना
संस्थान ने बताया कि परीक्षण के दौरान मानव विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे थे, इसलिए AI मॉडल अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सका। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मॉडल को ऐसा व्यवहार करने का कोई विशेष निर्देश नहीं दिया गया था। इसके बावजूद उसने पहली बार बिना किसी स्पष्ट आदेश के इस स्तर की स्वायत्तता, भ्रामक व्यवहार और स्वयं निर्णय लेने की क्षमता दिखाई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाएं संकेत देती हैं कि आने वाले समय में AI मॉडल केवल मददगार तकनीक नहीं रहेंगे बल्कि यदि उन पर पर्याप्त नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होगी तो वे साइबर सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां भी पैदा कर सकते हैं।












