राजेंद्र नगर में फौरन एक्शन ,भगीरथपुरा में अब तक संरक्षण?कहीं तत्काल सजा, कहीं जिम्मेदारों पर मेहरबानी

इंदौर। शहर की पुलिस व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में ऑटो चालक की आत्महत्या के मामले में तत्काल प्रभाव से थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर दिया जाता है, जबकि दूसरी ओर भगीरथपुरा थाना क्षेत्र में कस्टडी के दौरान एक फरियादी द्वारा फिनाइल पीकर आत्महत्या किए जाने के गंभीर मामले में आज तक संबंधित थाना प्रभारी पर कोई कार्रवाई नहीं होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
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शहर में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इंदौर पुलिस अलग-अलग मामलों में अलग-अलग पैमाने अपनाती है? क्या कार्रवाई का आधार केवल घटनाएं हैं या फिर उनके पीछे प्रभाव और दबाव भी काम करता है? क्योंकि घटना वाले समय 20 अप्रैल 2026 को श्रीराम पुत्र रमेशचंद झा की मौत के मामले में पुलिस अधिकारियों ने चौकी प्रभारी संजय धुर्वे और सिपाही योगेंद्र कोरव को हटाकर विभागीय जांच शुरू कर दी। लेकिन शहर में सवाल उठ रहे हैं कि क्या केवल लाइन अटैच करना और विभागीय जांच शुरू करना ही पर्याप्त कार्रवाई है?
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दरअसल, राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में एक ऑटो चालक ने कथित पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद मृतक द्वारा बनाया गया एक वीडियो भी सामने आया था। इस वीडियो में मृतक अभिषेक पाटिल ने स्पष्ट रूप से कहा था कि थाना प्रभारी नीरज बिरथरे ने उसके साथ किसी प्रकार की मारपीट, अभद्रता या प्रताड़ना नहीं की। उसने यह भी कहा था कि उस पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया गया।
इसके बावजूद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीर मानते हुए राजेंद्र नगर थाना प्रभारी नीरज बिरथरे को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया। इस कार्रवाई को लेकर पुलिस महकमे में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था। कई अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठने लगा था कि जब मृतक स्वयं वीडियो में टीआई को प्रत्यक्ष रूप से दोषमुक्त बता रहा था, तब इतनी त्वरित कार्रवाई किस आधार पर की गई?
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वहीं दूसरी ओर भगीरथपुरा थाना क्षेत्र में सामने आए बेहद संवेदनशील मामले में अब तक सन्नाटा पसरा हुआ है। जानकारी के अनुसार, एक वाहन चोरी के मामले में एक फरियादी को पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। इसी दौरान उसने कथित रूप से फिनाइल पी लिया। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
यह मामला सीधे तौर पर पुलिस कस्टडी और थाने की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ था। यदि कोई व्यक्ति पुलिस निगरानी में आत्मघाती कदम उठा लेता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी मानी जाएगी? हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में भगीरथपुरा थाना प्रभारी सियाराम गुर्जर के खिलाफ अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। न लाइन अटैच, न जांच पूरी होने तक हटाने की कार्रवाई और न ही किसी प्रकार की जवाबदेही तय की गई।












