इंदौर:हत्या के मामले में पति-पत्नी और बेटी बरी, कोर्ट ने सुनाया फैसला

इंदौर। अदालत ने माना कि व्यक्ति की हत्या हुई थी। इसके बावजूद आरोपियों की भूमिका संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सकी। गवाहों के बयान भी अलग-अलग थे। इसके साथ ही कोर्ट में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए।
कोर्ट का बड़ा फैसला, तीनों आरोपी बरी
वर्ष 2022 के बहुचर्चित हत्या केस में इंदौर के अपर सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए हत्या और हत्या के प्रयास के आरोपों से तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य पेश नहीं कर सके। अपर सत्र न्यायाधीश सुनील अहिरवार की अदालत ने 11 मई 2026 को यह फैसला सुनाया। मामले में आरोपी अब्दुल मजीद उर्फ मज्जू, गुलनाज उर्फ गुलफ्शा और नसीम बी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
ये भी पढ़ें: ‘10 रुपए का डायपर लीक नहीं होता, लेकिन...’ NEET विवाद पर खान सर भड़के, बोले- NTA मतलब ‘Never Trustable Agency’
2022 में हुई थी शख्स की हत्या
अभियोजन के अनुसार 12 अक्टूबर 2022 को पारिवारिक विवाद के दौरान आरोपियों ने अब्दुल हमीद के साथ लाठी डंडों से मारपीट की थी, जिससे उसकी मौत हो गई। वहीं उसकी पत्नी अनीसा को पहली मंजिल से नीचे फेंकने का भी आरोप लगाया गया था, जिससे वह घायल हो गई थी। मामला सामने आने के बाद यह प्रकरण काफी चर्चा में रहा था। पुलिस ने हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं में केस दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
अदालत ने मौत को माना हत्या जनित
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि मृतक अब्दुल हमीद की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि हत्या जनित थी। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि उपलब्ध साक्ष्य इतने मजबूत नहीं हैं कि आरोपियों की भूमिका को संदेह से परे साबित किया जा सके। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के कई गवाहों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते थे। कई महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि भी स्पष्ट रूप से नहीं हो सकी। इसी कारण अदालत ने आरोपियों को दोषी मानने से इंकार कर दिया।
ये भी पढ़ें: कूनो में KGP-12 चीता के 4 शावकों की मौत : सिर्फ 1 महीने के थे; एक दिन पहले CM ने छोड़े थे 2 चीते
कमजोर साक्ष्य के आधार पर रिहाई
मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता आशीष एस शर्मा और अधिवक्ता भाग्यश्री ने पैरवी की। उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि मामले में प्रत्यक्ष साक्ष्य कमजोर हैं और गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पारिवारिक और संपत्ति विवाद के चलते आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। अदालत ने इन तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया। अदालत ने भी अपने फैसले में गवाहों के विरोधाभास और कमजोर विवेचना को महत्वपूर्ण कारण माना है।












